टूटी-फूटी सड़कों से गुजरने वाली जनता ने पूछा सवाल..

- वीआईपी लोगों के घर और ऑफिस के बाहर की सड़क चकाचक, आम जनता टूटी सड़क पर चलने को मजबूर

बरेली : नेता हों या अफसर, शहर के विकास के लिए ये बड़े-बड़े दावे करने से नहीं चूकते. लेकिन, शहर की सड़कों का कहां कितना हुआ, यह जानकार आप चौंक जाएंगे. उन इलाकों की सड़कों का विकास तो करा लिया गया, जहां इनके घर और ऑफिस पड़ते हैं. लेकिन, टैक्स देने वाली जनता सिर्फ मुंह ताकती रह गई. खास लोगों के घर और ऑफिस के सामने वाली सड़कों पर न तो गढ्डे मिलेंगे और न ही धूल. वहीं आम जनता आज भी टूटी सड़कों पर गिरने और हादसों का शिकार होने को मजबूर है.

बजट का बड़ा हिस्सा खपाया

2018 में अवस्थापना निधि से शहर की सड़कों और नालों की दशा सुधारने के लिए करीब 7 करोड़ का बजट पास हुआ था. हैरत की बात यह है कि इस बजट का करीब 30 फीसदी हिस्सा उन वार्डो की सड़कों को चमकाने में लगा दिया गया, जहां माननीयों और अफसरों के घर और ऑफिस हैं. इतना ही नहीं हर तीन महीने में वीआईपी इलाकों की सड़कों का निरीक्षण कराकर मरम्मत भी करवाई जाती रही. फ्राइडे को दैनिक जागरण आईनेक्स्ट की टीम ने शहर के चार माननीयों के इलाकों का जायजा लिया.

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पूर्व मेयर के आवास की सड़क चमाचम

पूर्व मेयर डॉ. आईएस तोमर का आवास वार्ड नंबर 35 (रामपुर गार्डन) में है. विभागीय आंकड़ों के अनुसार, उनके वार्ड में सड़कों को चमकाने में पिछले साल करीब 10 लाख का बजट दिया गया.

वर्जन

जब मेरे पास निगम की जिम्मेदारी थी, तो शहर में हर वार्ड में विकास कार्य कराए गए. सिर्फ अपने क्षेत्र की ओर ध्यान नही दिया.

डॉ. आईएस तोमर, पूर्व मेयर.

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पूर्व सांसद 7.60 लाख साल भर में खर्च

पूर्व सांसद प्रवीन सिंह ऐरन की कोठी 37 नंबर वार्ड की सालवेशन आर्मी रोड पर है. इस रोड को पिछले साल करीब 7 लाख 60 हजार रुपये खर्च कर चमकाया गया.

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सांसद की सड़क भी चकाचक

भाजपा सांसद संतोष कुमार गंगवार का आवास और कार्यालय 55 नंबर वार्ड की कोहाड़ापीर से धर्मकांटा चौराहा जाने वाली रोड पर है. यह 55 नंबर वार्ड में आती है. इसे चमाचम करने के लिए निगम ने पिछले वर्ष करीब 12 लाख 50 हजार रुपये तक खर्च किए. वहीं हर माह इस रोड का निरीक्षण भी होता है. इस रोड पर जलभराव की समस्या के समाधान के लिए इन दिनों नाला बनाया जा रहा है.

वर्जन

जो बजट स्वीकृत होता है उससे विकास कार्य होते हैं. इसमे पक्षपात जैसी कोई बात नहीं है. कार्ययोजना के तहत ही विकास कार्य होते हैं.

सांसद, संतोष गंगवार.

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मेयर के कैंप ऑफिस की रोड भी ओके

सिविल लाइंस क्षेत्र में कैंट से चौकी चौराहा की ओर जाने वाली रोड पर मेयर डॉ. उमेश गौतम का कैंप ऑफिस है. इस रोड पर शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार का भी आवास है. इस रोड को पिछले माह दुरुस्त किया गया था, जिसमें 4.65 लाख रुपये खर्च हुए. भारी वाहनों की आवाजाही के चलते रोड कुछ जगह फिर उखड़ गई है, लिहाजा नगर निगम ने इस सड़क की रिपेयर के लिए कार्य योजना तैयार कर ली है.

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हमें वोट के बदले वादे मिलते हैं

माननीय का खौफ इतना है कि उनके क्षेत्र का विकास मुकम्मल रहता है. बजट तो करोड़ों का स्वीकृत होता है लेकिन यह कहां जाता है यह कोई नहीं जानता.

गजेंद्र यादव, मढि़नाथ

अपना क्षेत्र चमकाने की रीति पुरानी है. आमजन को तो विकास कार्यो के नाम पर बस छला जाता रहा है. विकास के नाम पर जनता से बस दावे ही होते रहेंगे

शीराज अनवर, बांसमंडी

करोड़ों रुपये के बजट में से अगर 30 फीसदी भी शहर के विकास में लगाया जाए तो तस्वीर बदल जाएगी. लेकिन यहां तो अपना-अपना की रीत है.

शाहिद रजा, लाल मस्जिद

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वर्जन --

जो बजट स्वीकृत होता है उससे पूरे शहर में विकास कार्य कराए जाते हैं. यह कहना ठीक नहीं होगा कि जिम्मेदार अपने ही इलाके को चमकाते हैं.

ईश शक्ति सिंह, अपर नगर आयुक्त.