- कमिश्नरी में मीटिंग के दौरान डीजीपी ने सावन में सुरक्षा के लिए घाटों पर गोताखोरों को चुस्त रहने का दिया निर्देश

- टे्रंड गोताखोरों के इंतजार में है दशाश्वमेध घाट की जल पुलिस, मल्लाह व एनडीआरएफ से लेती है पुलिस मदद

शायद डीजीपी ओपी सिंह साहब इस बात से अंजान हैं कि बनारस जल पुलिस के पास गोताखोर है. तभी तो उन्होंने शुक्रवार को कमिश्नरी सभागार में बैठक के दौरान सावन में कांवरियों की सुरक्षा को लेकर गोताखोरों को मुस्तैद रहने की हिदायत दी. जबकि बनारस जल पुलिस के पास ट्रेंड गोताखोर हैं ही नहीं. कहने को तो जल पुलिस की लंबी चौड़ी फौज है लेकिन अभी तक किसी की जान जल पुलिस अपने बूते नहीं बचा सकी है. सावन में लाखों भक्तों का जुटान गंगा घाटों पर होता है.

लेनी पड़ती है मदद

अमूमन ऐसा कोई सप्ताह नहीं जाता जिसमें गंगा में कोई समाया न होता हो. डूबने के आधे या फिर एक घंटे बाद पुलिस घटनास्थल तक पहुंचती है और एनडीआरएफ से शव ढूंढ़ने की गुहार लगाती है. एनडीआरएफ के आने में समय लगता है तो स्थानीय मल्लाहों से फौरी तौर पर मदद ली जाती है. मगर, जल पुलिस के एसआई या फिर कांस्टेबल पानी में नहीं उतरते हैं. जल पुलिस के पास यह भी आंकड़े नहीं है कि अब तक कितने लोगों की जान बचाई जा चुकी है.

सुरक्षा में सेंध

सावन माह 17 जुलाई से शुरू हो रहा है. हालांकि कांवरियों का जत्था शहर की ओर कूच करने लगा है. गंगा घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर कुछ खास मुस्तैदी अभी नहीं देखी जा रही है. आंतकी हमले झेल चुके काशी के दशाश्वमेध और शीतला घाट पर लगे डोर मेटल डिटेक्टर खराब हैं. अब तो अपने तय स्थान से डीएमडी हट भी गए हैं. वहीं अधिकतर घाटों पर सीसीटीवी कैमरे भी सिर्फ शोपीस बन गये हैं. ऐसे में डीजीपी साहब का अभेद्य सुरक्षा का दावा कितना असरदार होता है कि यह भी देखने वाली बात होगी.

जल पुलिस की स्टे्रंथ

01

प्रभारी है तैनात

02

दारोगा की है तैनाती

12

हेड कांस्टेबल हैं तैनात

10

कांस्टेबल हैं

00

दक्ष गोताखोर