वेस्ट बंगाल की आर्टिस्ट देवोलीना ने 'तुमार घरो बासवो आमि जानो ना' और तुमार आपनों के राखबो गाकर बटोरी तालियां

<वेस्ट बंगाल की आर्टिस्ट देवोलीना ने 'तुमार घरो बासवो आमि जानो ना' और तुमार आपनों के राखबो गाकर बटोरी तालियां

patna@inext.co.in

PATNA (9 Feb) :

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PATNA (9 Feb) : म्यूजिक किसी बाउंड्री से बंध कर नहीं रह सकती, तभी तो सूफी सूत्रा के कन्सर्ट में देश-विदेश के आर्टिस्टों ने जब एक साथ परफॉर्म करना शुरू किया, तो मानों समय भी थम गया. संडे को स्वीडन और बांग्लादेश की बैंड ने एक साथ बजाया और गाया. इसके बाद बांग्लादेशी और वेस्ट बंगाल की टीम ने भी स्टेज एक साथ शेयर किया. जब वेस्ट बंगाल की आर्टिस्ट देवोलीना ने 'तुमार घरो बासवो आमि जानो ना' और तुमार आपनों के राखबो, छेड़े देबू ना' गाया तो दर्शक झूम उठे. इसके बाद स्वीडन की बैंड ने ट्रेडिशन स्वीडिशन सांग और ड्रम की थाम पर म्यूजिकल कंपोजीशन दिया, साथ ही एक चाइल्ड फेवरेट लालाबाइन भी बड़ी खूबसूरती से पेश किया.

वेस्ट की म्यूजिक में बीट है इम्पार्टेट

सूफी सूत्रा के दौरान वेस्ट और ईस्ट के आर्टिस्टों ने एक साथ परफॉर्म किया, जो आसान नहीं था. इसके लिए कई बातों को ध्यान में रखकर परफॉर्म करना था. इसमें स्वीडन की बैंड के साथ मंच शेयर कर जबरदस्त परफॉर्मेस दिया सिंगर सौरभ शालीन ने. उन्होंने स्वीडन की बैंड के साथ साउथ इंडियन राग राग किरवानी पर बेस्ड लालाबाइन गाया, जो एक मेलोडियस सांग हैं. इसमें खास बात यह रही की वेस्ट की म्यूजिक में बीट इम्पार्टेट होता है जबकि इंडियन में राग. लेकिन इसमें अच्छी सिंक्रोनाइजेशन की गई. बिहार की संगीत शिक्षायतन टीम के म्यूजिक डायरेक्टर शौरभ शालीन से बातचीत के प्रमुख अंश.

इंडियन और वेस्ट म्यूजिक में सिंक्रोनाइजेशन कैसे किया गया?

इंडियन म्यूजिक में कई बारीकियां हैं. कोई भी सांग हो, कंपोजीशन हो, सात सुरों से अलग कुछ नहीं. लेकिन वेस्ट में म्यूजिक अक्सर बीट प्रधान होता है, जिसमें सिंक्रोनाइजेशन निरंतर रियाज से पॉसिबल हुआ.

राग किरवानी के बारे में बताएं?

इसे मैंने स्वीडिस बैंड के साथ लालाबाइन में यूज किया है. यह करुणा का राग है, जो कर्नाटक म्यूजिक पर बेस्ड है.

क्या सूफी अब ऑरिजनल फॉर्म में बचा हुआ लगता है?

पुराने घरानों ने इसे बचाए रखा है, लेकिन रिसेंटली एक्सपेरिमेंट भी खूब हुए हैं. इसमें बाजार को खास ध्यान में रखा गया है. यह इसके वास्तविक स्वरूप से हटकर है.