- शहर की सड़कों पर कचरा फैला रहीं शराब की दुकानें

- हर माह 40 से 50 टन कचरा उठा रही जीएमसी की गाड़ी

GORAKHPUR: शहर के भीतर शराब बेचने वाली सरकारी दुकानें नगर निगम के लिए मुसीबत बनती जा रही हैं. दुकानों के बाहर वेस्ट मैटेरियल्स समेटने की जिम्मेदारी जीएमसी की गाड़ी उठा रही है. शिकायत मिलने पर आबकारी विभाग के अधिकारी दुकानों का दो हजार रुपए का जुर्माना काटकर जिम्मेदारी पूरी कर लेते हैं. शहर में शराब की दुकानों पर वेस्ट मैटिरियल्स को कलेक्ट करके निस्तारित करने का मैनेजमेंट न होने की वजह से 35 दुकानों का चालान कट चुका है. जिला आबकारी अधिकारी का कहना है कि जांच करके कार्रवाई की जाती है. सभी दुकानदारों से कहा गया है कि वह अपनी दुकानों के आगे डस्टबिन लगाएं. सड़कों पर किसी तरह की बोतल, केन या रैपर फैला नजर नहीं आना चाहिए.

सबसे ज्यादा कचरा फैलाती देसी की दुकानें

देसी की कुल 279 दुकानों से हर माह करीब 18 लाख लीटर यानि करीब 90 लाख शीशी शराब बिक जाती है. देसी की दुकानों के आसपास ही शराब पीने के उपयोग में आने वाली अन्य वस्तुओं की बिक्री होती है. इनमें पानी, सोडा, नमकीन, प्लास्टिक के गिलास शामिल हैं. एक अनुमान लगाया गया है कि एक शीशी शराब पीने के लिए औसतन कम से कम एक प्लास्टिक का गिलास, एक पाउच पानी और अन्य चीजें यूज की जाती है. ऐसे में जहां 90 लाख शीशी मात्र देसी शराब की निकलती है. वहीं पर अन्य सामानों को जोड़ दिया जाए तो यह आकड़ा दो करोड़ से अधिक पार कर जाएगा. देसी के अतिरिक्त अंग्रेजी शराब, बीयर के केन की बॉटल को जोड़ लें तो आंकड़ा साढ़े तीन करोड़ से अधिक पार कर जाएगा. गोलघर सहित अन्य प्रमुख जगहों पर रोजाना सुबह नगर निगम के कर्मचारी शराब की दुकानों के आगे से कचरा साफ करते हैं.

दो हजार रुपए का जुर्माना, नहीं पड़ता फर्क

मॉडल शॉप, बीयर और देसी शराब की दुकानों के आसपास कचरा फैलाने पर दो हजार रुपए का जुर्माना वसूलने का नियम है. आबकारी विभाग के अधिकारी जांच के दौरान दुकान मालिक से दो हजार रुपए ले सकते हैं. जिला आबकारी विभाग के लोगों का कहना है कि कचरा एकत्र करके उसके निस्तारण का निर्देश दिया जाता है. लेकिन यदि कोई उल्लंघन करता है तो कार्रवाई की जाती है.

फैक्ट फिगर

मॉडल शॉप 12

बीयर शॉप 107

अंग्रेजी शराब की शॉप 115

देसी शराब की दुकानें 279

वर्जन

नियमानुसार दुकानों के आसपास किसी तरह का कचरा नहीं फैलना चाहिए. यदि ऐसा पाया जाता है कि संबंधित के खिलाफ दो हजार रुपए का जुर्माना वसूला जाता है. अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी.

वीपी सिंह, जिला आबकारी अधिकारी