हैलो.., बच्चे घर पहुंच गए क्या?
Worried parents

Allahabad: सेंट मैरीज स्कूल के सामने बदहवास खड़े मीरापुर के अरुण कुमार लगातार घर से कांटैक्ट करने की कोशिश कर रहे थे. फोन उठते ही पूछा, बेटी घर पहुंची या नहीं. जबाव मिला, नहीं तो वे बेचैन हो उठे. फोन उठाने वाले से कहा, स्कूल वाले तो बता रहे हैं कि बच्ची बस से निकल गई है. स्कूल से निकले एक घंटे हो गए हैं. बस की लोकेशन भी नहीं मिल रही है. ये ड्राइवर एक फोन भी नहीं कर सकते. परेशान हो गए, क्या करें समझ में नहीं आया और वहीं टहलने लगे. रुंआसे से हो गए थे क्योंकि इस स्कूल के आसपास के एरिया का माहौल बुरी तरह से खराब था और बसों में तोडफ़ोन की सूचना भी आ रही थी. करीब आधे घंटे बाद मोबाइल बजा और घर का नंबर फ्लैश हुआ तो एक रिंग पर ही उन्होंने रिसीव कर लिया. सूचना मिली कि बेटी सही-सलामत पहुंच चुकी है तो राहत की लंबी सांस ली. एक अरुण ही नहीं सैकड़ों लोग ऐसे थे जो इसी तरह परेशान हाल में अपने बच्चों की लोकेशन जानने की कोशिश कर रहे थे. कई महिलाएं तो बच्चियों को लेकर स्कूल के बाहर निकलने का साहस नहीं बटोर पा रही थीं. इस चक्कर में उन्होंने घंटों स्कूल कैंपस और उसके बाहर ही बिता दिया. 

पैदल ही निकल पड़े
बच्चे को लेकर पैदल ही निकल पड़े  अशोक नगर में रहने वाले आस्था दुबे की बेटी अदिति एसएमसी में क्लास फोर्थ में पढ़ती है. लोक सेवा आयोग चौराहे पर बवाल के कारण इस रोड पर लंबा जाम था. बवाल के दौरान ही स्कूल छूट गया. बेटी को स्कूल लेने पहुंची आस्था को आधा किलोमीटर पहले ही अपनी कार छोडऩी पड़ी. पैदल वह स्कूल तक पहुंची और धूप में बच्ची को लेकर किसी तहर वापस कार तक पहुंची. आस्था ने बताया कि बच्ची को कुछ हो ना जाए, इस डर वह लगभग दौड़ती हुई स्कूल पहुंचीं. स्कूल कैंपस में तब तक रहीं जब तक बाहर के माहौल को निकलने योग्य समझ नहीं लिया. यही हाल उन सभी पैरेंट्स का भी था, जो स्कूल अपने बच्चों को लेने पहुंचे थे. 

School administration ने parents को बुलाया 
बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन का रवैया भी पैरेंट्स की प्राब्लम बढ़ाने वाला था. स्कूल क्लोज होने के टाइम पर बच्चों को स्कूल बस से भेज दिया गया और फिर मैसेजे भेजा गया कि माहौल खराब है और आप आकर अपने बच्चों को खुद ले जाएं. स्कूल से कॉल आते ही पैरेंट्स स्कूल पहुंचने लगे. वहां कई बच्चों के न मिलने पर पैरेंट्स परेशान हो उठे. स्कूल एडिमिनिस्ट्रेशन से पूछने पर जवाब मिला कि बच्चों को पहले ही बस से घर भेज दिया गया है. लेकिन, बच्चे के घर पहुंचने की कन्फर्मेंशन न मिलने से इन पैरेंट्स की सांसें टंग गईं. उन्होंने स्कूल बस की लोकेशन लेने की कोशिश की तो उसका भी पता नहीं चला. जाम और बवाल में फंसे बच्चे घंटों देर से घर पहुंचे. इस दौरान पैरेंट्स हर संभव माध्यम से उनका पता लगाने की कोशिश करते रहे.

अटकी रही parents की जान 
स्कूल से मैसेज मिलते ही बड़ी संख्या में पैरेंट्स स्कूल पहुंच गए. जिसका बच्चा स्कूल में मिल गया वह तो फौरन लेकर चला गया, लेकिन जो बच्चे पहले निकल गये थे उनके पैरेंट्स की जान घंटों सांसत में फंसी रही. दोपहर के साढ़े तीन बजे तक यह क्रम चलता रहा. स्कूल के आसपास कई तरफ रोड ब्लाक होने के कारण लोगों को काफी प्रॉब्लम हुई. 

मम्मी ये क्या हो रहा है 
बवाल के दौरान जब पैरेंट्स बच्चों को लेकर लौट रहे थे तो तो कई बच्चे रोड पर इतनी भीड़ देखकर सहम गए. बच्चे अपने पैरेंट्स से बार-बार यही पूछ रहे थे कि ये क्या हो रहा है. इतने अंकल रोड पर क्यों बैठे हैं और ये शोर क्यों मचा रहे हैं. कुछ हो गया क्या?

रोड पर थम गया शहर
आरक्षण के बवाल के दौरान सिटी सड़कों पर व्हीकल्स की कतार लग गई. चौराहे जाम के आगोश में आ गए. ट्रैफिक सड़कों पर बस रेंग रहा था. चंद मिनट का सफर पूरा करने में घंटों टाइम वेस्ट करना पड़ा. प्राब्लम यह थी कि पैदल चलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था और पैदल चलने पर खतरा यह था कि किन बवाल में फंस जाएं. सिविल लाइंस, म्योहाल, धोबी घाट चौराहा, एकलव्य चौराहा, पानी की टंकी चौराहा, हॉट स्टफ चौराहा, सुभाष चौराहा समेत कई ऐसे चौराहे थे जहां इस तरह की स्थिति देखने को मिली. लोग प्रशासन और प्रदर्शनकारियों को कोस रहे थे. 


स्कूल छूटते ही बढ़ गया pressure 
लोक सेवा आयोग मार्ग तो सुबह दस बजे से ही जाम था. इसके चलते हिन्दू हॉस्टल चौराहा, हनुमान मंदिर चौराहा, म्योहाल और धोबी घाट चौराहे से ट्रैफिक को डाइवर्ट कर दिया गया था. इसके अलावा बैंक रोड से ममफोर्डगंज और कचहरी से बेली रोड की तरफ भी प्रदर्शनकारियों का एक गुट होने से ट्रैफिक पर भारी दबाव आ गया. इस एरिया में दर्जनों कांवेंट और रिनाउंड स्कूल हैं.  इससे बच्चे निकले तो वाहनों का प्रेशर बढ़ा. बड़ी संख्या में स्कूल बस, आटो, रिक्शा और पैरेंट्स के वाहन आ जाने से दबाव बढ़ गया और ट्रैफिक पुलिस का पूरा वैकल्पिक इंतेजाम फेल हो गया. ट्रैफिक तोडऩे वालों ने आग में घी डाला तो पैदल चलने के अलावा कोई चारा नहीं बचा. इसका परिणाम यह रहा कि दोपहर बाद दो बजे तक घर पहुंच जाने वाले बच्चे शाम चार बजे तक घर पहुंचे. इससे पूरे परिवार की जान अटकी रही. 

पैदल ही निकल पड़े

बच्चे को लेकर पैदल ही निकल पड़े  अशोक नगर में रहने वाले आस्था दुबे की बेटी अदिति एसएमसी में क्लास फोर्थ में पढ़ती है. लोक सेवा आयोग चौराहे पर बवाल के कारण इस रोड पर लंबा जाम था. बवाल के दौरान ही स्कूल छूट गया. बेटी को स्कूल लेने पहुंची आस्था को आधा किलोमीटर पहले ही अपनी कार छोडऩी पड़ी. पैदल वह स्कूल तक पहुंची और धूप में बच्ची को लेकर किसी तहर वापस कार तक पहुंची. आस्था ने बताया कि बच्ची को कुछ हो ना जाए, इस डर वह लगभग दौड़ती हुई स्कूल पहुंचीं. स्कूल कैंपस में तब तक रहीं जब तक बाहर के माहौल को निकलने योग्य समझ नहीं लिया. यही हाल उन सभी पैरेंट्स का भी था, जो स्कूल अपने बच्चों को लेने पहुंचे थे. 

School administration ने parents को बुलाया 

बच्चों की सुरक्षा को लेकर स्कूल एडमिनिस्ट्रेशन का रवैया भी पैरेंट्स की प्राब्लम बढ़ाने वाला था. स्कूल क्लोज होने के टाइम पर बच्चों को स्कूल बस से भेज दिया गया और फिर मैसेजे भेजा गया कि माहौल खराब है और आप आकर अपने बच्चों को खुद ले जाएं. स्कूल से कॉल आते ही पैरेंट्स स्कूल पहुंचने लगे. वहां कई बच्चों के न मिलने पर पैरेंट्स परेशान हो उठे. स्कूल एडिमिनिस्ट्रेशन से पूछने पर जवाब मिला कि बच्चों को पहले ही बस से घर भेज दिया गया है. लेकिन, बच्चे के घर पहुंचने की कन्फर्मेंशन न मिलने से इन पैरेंट्स की सांसें टंग गईं. उन्होंने स्कूल बस की लोकेशन लेने की कोशिश की तो उसका भी पता नहीं चला. जाम और बवाल में फंसे बच्चे घंटों देर से घर पहुंचे. इस दौरान पैरेंट्स हर संभव माध्यम से उनका पता लगाने की कोशिश करते रहे.

अटकी रही parents की जान 

स्कूल से मैसेज मिलते ही बड़ी संख्या में पैरेंट्स स्कूल पहुंच गए. जिसका बच्चा स्कूल में मिल गया वह तो फौरन लेकर चला गया, लेकिन जो बच्चे पहले निकल गये थे उनके पैरेंट्स की जान घंटों सांसत में फंसी रही. दोपहर के साढ़े तीन बजे तक यह क्रम चलता रहा. स्कूल के आसपास कई तरफ रोड ब्लाक होने के कारण लोगों को काफी प्रॉब्लम हुई. 

मम्मी ये क्या हो रहा है 

बवाल के दौरान जब पैरेंट्स बच्चों को लेकर लौट रहे थे तो तो कई बच्चे रोड पर इतनी भीड़ देखकर सहम गए. बच्चे अपने पैरेंट्स से बार-बार यही पूछ रहे थे कि ये क्या हो रहा है. इतने अंकल रोड पर क्यों बैठे हैं और ये शोर क्यों मचा रहे हैं. कुछ हो गया क्या?

रोड पर थम गया शहर

आरक्षण के बवाल के दौरान सिटी सड़कों पर व्हीकल्स की कतार लग गई. चौराहे जाम के आगोश में आ गए. ट्रैफिक सड़कों पर बस रेंग रहा था. चंद मिनट का सफर पूरा करने में घंटों टाइम वेस्ट करना पड़ा. प्राब्लम यह थी कि पैदल चलने के अलावा कोई विकल्प नहीं था और पैदल चलने पर खतरा यह था कि किन बवाल में फंस जाएं. सिविल लाइंस, म्योहाल, धोबी घाट चौराहा, एकलव्य चौराहा, पानी की टंकी चौराहा, हॉट स्टफ चौराहा, सुभाष चौराहा समेत कई ऐसे चौराहे थे जहां इस तरह की स्थिति देखने को मिली. लोग प्रशासन और प्रदर्शनकारियों को कोस रहे थे. 

स्कूल छूटते ही बढ़ गया pressure 

लोक सेवा आयोग मार्ग तो सुबह दस बजे से ही जाम था. इसके चलते हिन्दू हॉस्टल चौराहा, हनुमान मंदिर चौराहा, म्योहाल और धोबी घाट चौराहे से ट्रैफिक को डाइवर्ट कर दिया गया था. इसके अलावा बैंक रोड से ममफोर्डगंज और कचहरी से बेली रोड की तरफ भी प्रदर्शनकारियों का एक गुट होने से ट्रैफिक पर भारी दबाव आ गया. इस एरिया में दर्जनों कांवेंट और रिनाउंड स्कूल हैं.  इससे बच्चे निकले तो वाहनों का प्रेशर बढ़ा. बड़ी संख्या में स्कूल बस, आटो, रिक्शा और पैरेंट्स के वाहन आ जाने से दबाव बढ़ गया और ट्रैफिक पुलिस का पूरा वैकल्पिक इंतेजाम फेल हो गया. ट्रैफिक तोडऩे वालों ने आग में घी डाला तो पैदल चलने के अलावा कोई चारा नहीं बचा. इसका परिणाम यह रहा कि दोपहर बाद दो बजे तक घर पहुंच जाने वाले बच्चे शाम चार बजे तक घर पहुंचे. इससे पूरे परिवार की जान अटकी रही.