हमारे ऋषि मुनियों ने सूर्य चन्द्र ग्रहण लगने के समय भोजन करने के लिये मना किया है क्योंकि उनकी मान्यता थी कि ग्रहण के समय में कीटाणु बहुलता से फैल जाते हैं। इसलिये ऋषियों ने पात्रों में क़ुश अथवा तुलसी डालने को कहा है, ताकि सब कीटाणु कुश में एकत्रित हो जायें और उन्हें ग्रहण के बाद फेंका जा सके। ग्रहण वेध के पहले जिन पदार्थों में कुश या तुलसी की पत्तियां डाल दी जाती हैं, वे पदार्थ दूषित नहीं होते।पात्रों में अग्नि डालकर उन्हें पवित्र बनाया जाता है, ताकि कीटाणु मर जायें।& फिलहाल जानते हैं ग्रहण फल राशि के अनुसार...

ग्रहण फल...

मेष - मान नाश

वृष- मृत्युतुल्य कष्ट

मिथुन- स्त्रीपीड़ा

कर्क- सौख्य

सिंह- चिन्ता

कन्या- व्यथा

तुला-श्री

वृश्चिक- क्षति

धनु- घात

मकर- हानि

कुम्भ- लाभ

मीन- सुख

-ज्योतिषाचार्य पंडित गणेश प्रसाद मिश्र

Posted By: Vandana Sharma