यह व्रत सभी लोग कर सकते हैं, इस एकादशी को भगवान नारायण की पूजा-आराधना की जाती है।श्री नारायण भगवान विष्णु का ही नाम है।इस दिन व्रती रहकर भगवान नारायण की मूर्ति को स्नान कराकर भोग लगाते हुए पुष्प धूप,दीप प्रज्वलित कर आरती करनी चाहिए।इस एकादशी में गरीब ब्राह्मण को दान करना परम श्रेयस्कर है।

वृक्ष काटने जैसे पाप से भी मिल सकती है मुक्ति
इस एकादशी का व्रत करने से सम्पूर्ण पाप नष्ट हो जाते हैं और पीपल वृक्ष के काटने जैसे पाप तक से मुक्ति मिल जाती है।यहां तक की किसी के दिए गए श्राप तक का निवारण हो जाता है।इस व्रत को करने से व्रती इस लोक में सुख भोगकर अंत में मोक्ष को प्राप्त कर स्वर्ग लोक की प्राप्ति करता है।यह एकदशी देह की समस्त आधी-व्याधियों को नष्ट कर सुंदर रूप,गुण और यश देने वाली है।

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ये है योगिनी एकादशी की प्राचीन कथा
प्राचीन काल में अलका पुरी में राजा कुबेर के यहां हेम नाम का एक माली रहता था।उसका कार्य नित्य प्रति भगवान शंकर के पूजनार्थ मानसरोवर से फूल लाना था।एक दिन उसे अपनी पत्नी के साथ स्वछंद विहार करने के कारण फूल लाने में बहुत देर हो गई।वह दरबार मे विलंब से पहुंचा।इससे क्रोधित होकर कुबेर ने उसे कोढ़ी होने का श्राप दे दिया।श्राप से कोढ़ी होकर हेम माली इधर-उधर भटकता हुआ एक दिन दैवयोग से मार्कण्डेय ऋषि के आश्रम में जा पहुंचा।ऋषि ने अपने योग बल से उसके दुखी होने का कारण जान लिया।तब उन्होंने उसे योगिनी एकादशी का व्रत करने को कहा।व्रत के प्रभाव से हेम माली का कोढ़ समाप्त हो गया और वह दिव्य शरीर धारण कर स्वर्गलोक को प्रस्थान कर गया।इति श्री।

ज्योतिषविद पं राजीव शर्मा
चीफ वार्डन,सिविल डिफेंस, बरेली।