क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: झारखंड की राज्यपाल द्रौपदी मुर्मू को कार्यक्रम के दौरान विस्फोट से उड़ाने की धमकी और गिरिडीह के नगर थाना को बंद नहीं करने पर उड़ाने की धमकी के मामले में गठित एसआइटी ने अपनी रिपोर्ट झारखंड पुलिस मुख्यालय को सौंप दी है. एसआइटी की रिपोर्ट को पुलिस मुख्यालय ने आगे की कार्रवाई के लिए सरकार को सौंप दी है. रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि धमकी देने वाला कोई नक्सली नहीं, बल्कि एक सिरफिरा है, जो साल 2016 में भी राजभवन को बम से उड़ाने की धमकी दे चुका है. एसआईटी रिपोर्ट के अनुसार, उस शख्स की पहचान हो चुकी है और तलाश जारी है.

एसआईटी का हुआ था गठन

चार दिन पहले राजभवन को धमकी भरा पत्र मिलने के बाद पुलिस मुख्यालय के आदेश पर एक एसआइटी का गठन किया गया था. एसआइटी में विशेष शाखा के एसपी सुरक्षा आलोक, एसपी ऑपरेशन मोहम्मद अर्शी और सीआइडी के डीएसपी रवींद्र कुमार राय शामिल किए गए थे. एसआइटी की जांच में यह पता चला कि एक ही तरह के लेटरपैड पर नक्सलियों के नाम पर धमकी भरा पत्र बड़कागांव, नवादा के सीओ, गया के एक अधिकारी को भी भेजा गया था. पत्र में नीचे नक्सलियों के नाम पर लाल सलाम भी लिखा गया था.

क्या मिली थी धमकी

राज्यपाल को जो पत्र भेजा गया था, उसमें लिखा गया था कि गिरिडीह के नगर थाना को दस दिनों के भीतर बंद करा दें. नहीं बंद कराने पर थाना भवन को उड़ा दिया जाएगा. अगर थाना बंद नहीं हुआ तो राज्यपाल को भी एक कार्यक्रम में उड़ा दिया जाएगा. वहीं, बड़कागांव के अंचलाधिकारी से नक्सलियों के नाम पर 20 लाख की रंगदारी की मांग की गई थी. यह भी धमकी दी गई थी कि 20 लाख रुपए नहीं देने पर दस दिनों के भीतर उनके कार्यालय को ग्रेनेड से उड़ा दिया जाएगा. एसआइटी की रिपोर्ट में चिट्ठी फर्जी मिली है.