क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ : रांची नगर निगम ने 18 करोड़ रुपये खर्च कर स्लॉटर हाउस बनवाया है. इसके पीछे शहर में खुले में मीट बेचने पर रोक लगाना मेन मकसद था लेकिन छह माह पहले बनकर तैयार इस स्लाटर हाउस में अब तक एक बकरा नहीं कटा. ऐसे में हालात भयावह होते जा रहे हैं. स्लाटर हाउस के न चलने से मेंटीनेंस खर्चा और कर्मियों के लिए वेतन तक नहीं निकल पा रहा है. जबकि इस स्लॉटर हाउस में डेली 1000 पशुओं (खस्सी, बकरा, भेड़) को काटने और उनके मीट को प्रोसेस करने की क्षमता है. इसके बाद भी स्लाटर हाउस को बकरों का इंतजार है. वहीं दूसरी तरफ इसके नियमों को लेकर भी स्थानीय मांस व्यवसायी असंतुष्ट हैं. इसके विरोध में इन्होंने झारखंड हाई कोर्ट की शरण ली है.

मॉडल शॉप भी हुए बंद

नगर निगम ने स्लॉटर हाउस में कटने वाले बकरों की बिक्री के लिए शहर में पांच मॉडल शॉप भी खोले थे. लाखों रुपये खर्च कर खोले गए इन माडॅल शॉप में हाइजेनिक मीट मिलने के दावे किए गए थे. लेकिन, विवादों और अव्यवस्था के कारण बकरा नहीं कटने से खुले पांचों मॉडल शॉप भी बंद हो गए. यहां से कुछ ही दिनों तक लोगों को बकरे का हाइजेनिक मीट मिल पाया था.

नगर निगम ने फंसा रखा है पेंच

स्लॉटर हाउस के अधिकारियों की मानें तो नगर निगम अगर उन्हें जल्द सहयोग नहीं करता तो इसे चलाने के लिए अब और इंतजार करना मुश्किल होगा. यही नहीं स्लॉटिंग के लिए कंपनी ने निगम से चार माह पहले अनुमति मांगी, ताकि वह खुद से स्लॉटर हाउस में बकरा कटवाकर मॉडल मटन शॉप, रेस्टोरेंट, होटल और बाजार में बेच सके. लेकिन निगम के अधिकारियों ने कानूनी परामर्श लेने के नाम पर इस मामले को अटका रखा है. दूसरी तरफ निगम शहर में अवैध स्लॉटिंग पर रोक लगाने में भी पूरी तरह से नाकाम है.

कारोबारियों ने नकारा

वहीं शहर के मटन कारोबारियों ने स्लॉटर हाउस जाकर बकरा कटवाने के खिलाफ हाईकोर्ट में केस कर रखा है. उनका तर्क है कि कांके में बना निगम का स्लॉटर हाउस शहर से काफी दूर है. बकरा लाने और ले जाने में उनका खर्च अधिक होगा. मटन महंगा बेचना पड़ेगा और आमदनी कम होगी.

यहां खोले गए थे पांच माडल शॉप

नगर निगम ने मोरहाबादी मैदान, कांटाटोली, बूटी मोड़ व मधुकम में हाइटेक वातानुकूलित मटन शॉप खोले थे. शॉप से बकरे का मीट 400 रुपये और खस्सी का मीट 500 रुपये प्रति किलो की दर से बेचना था. लेकिन स्लॉटर हाउस में बकरा नहीं कटने के कारण सभी मटन शॉप बंद हैं.

60 लोगों के रोजगार पर आफत

स्लॉटर हाउस के संचालन के लिए 60 कर्मचारियों को रखा गया है. इनमें कई इंजीनियर और टेक्नीशियन शामिल हैं. इन सभी कर्मचारियों को वेतन देने में 13 से 14 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं. वहीं, हर महीने दो से तीन लाख रुपये बिजली का बिल आ रहा है. पशुओं की कटाई नहीं होने के कारण कर्मचारी खाली बैठे रहते हैं. इससे स्लॉटर हाउस बंद होने के कगार पर है. इससे कई लोगों के रोजगार पर आफत आन पड़ी है.