रांची: सरकारी स्कूलों की दशा यहां के टीचर्स ही सुधार सकते हैं. इन स्कूलों में प्रतिभावान टीचर्स की ही नियुक्ति होती है, लेकिन अफसोस की बात है कि खुद टीचर्स भी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में डालते. उनकी प्राथमिकता प्राइवेट स्कूल ही होते हैं. यही वजह है कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर गिरता जा रहा है. उक्त बातें नगर विकास मंत्री सीपी सिंह ने शनिवार को यूजी एवं पीजी ट्रेंड शिक्षकों को नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में कही. शहीद चौक स्थित अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव जिला स्कूल में आयोजित इस कार्यक्रम में 580 यूजी-पीजी ट्रेंड टीचर्स को नियुक्ति पत्र सौंपा गया.

अमेरिका में अलग है माहौल

इस मौके पर मंत्री श्री सिंह ने अमेरिका का हवाला देते हुए कहा कि उनके परिवार के एक सदस्य जो वहां रहते हैं. उन्होंने वहां अपने बच्चे को सरकारी स्कूल में दाखिला कराया, तो श्री सिंह ने उनसे पूछा कि आखिर पैसों की कोई नहीं रहने के बावजूद सरकारी स्कूल में बच्चे को क्यों पढ़ा रहे हैं? जवाब मिला कि अमेरिका में प्राइवेट स्कूलों की तुलना में सरकारी स्कूलों में बेहतर पढ़ाई होती है. इस पर श्री सिंह ने कहा कि आज जितने टीचर्स को नियुक्ति पत्र मिला है, वे जहां कहीं भी नियुक्त किए जाएं, वहां के बच्चों को अपना बच्चा समझ कर पढ़ाएं. तभी स्कूलों में पढ़ाई का स्तर सुधरेगा.

316 महिला टीचर्स की हुई बहाली

कार्यक्रम में रांची जिले के माध्यमिक विद्यालयों में 251 तथा प्लस टू विद्यालयों में 65 महिला टीचर्स को नियुक्ति पत्र सौंपा गया. इस तरह कुल 316 महिलाओं को विभिन्न स्कूलों में पदस्थापित किया गया है. दूसरी ओर मिडिल स्कूलों में 210 और प्लस टू स्कूलों में 54 यानी कुल 264 पुरुष शिक्षकों को पदस्थापित किया गया.

किस सब्जेक्ट के कितने टीचर्स को मिला नियुक्ति पत्र

विषय - मिडिल स्कूल प्लस टू स्कूल

हिन्दी - 59 - 15

इंग्लिश - 62 - 8

नागपुर - 13

कुरमाली - 4

मुंडारी - 5

पंचपरगनिया - 6

कुड़ुख - 3

बांग्ला - 2

मैथ्स, फिजिक्स - 44 - 5

बायो-कैमिस्ट्री - 59 - 21

भूगोल - 58 - 17

इकोनॉमिक्स - 52 - 15

कॉमर्स - 6 - 17

होम साइंस - 14

फिजिकल एजुकेश - 74

संस्कृत - 0 - 9

इतिहास - 0 - 12

रेजा से टीचर तक का सफर तय किया मुन्नावती ने

शनिवार को जिन टीचर्स को नियुक्ति पत्र मिला, उनमें से एक टीचर ऐसी भी हैं, जिन्होंने रेजा का काम कर पढ़ाई की और यूनिवर्सिटी टापर रहने के साथ अपनी बीएड की पढ़ाई पूरी की. इनका नाम मुन्नावती कुमारी हैं, जिन्हें संस्कृत के टीचर के रूप में मंत्री सीपी सिंह ने नियुक्ति पत्र सौंपा. इस मौके पर मुन्नावती ने बताया कि उन्होंने काफी संघर्ष करने के बाद अपनी पढ़ाई पूरी की. उनका घर उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र में पड़ता है और पढ़ाई के लिए उन्हें अपने घर से 12 किलोमीटर पैदल चलकर आना पड़ता था. पिता का निधन हो चुका है. गरीबी में आकंठ डूबे होने के कारण उनके सामने मजदूरी करने के अलावा कोई चारा नहीं था. उन्होंने करमचंद भगत कॉलेज बेड़ो से इंटर की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद उन्होंने एसएस हाई स्कूल में पढ़ाना शुरू किया, जहां उन्हें एक महीने में केवल एक हजार रुपए मिलते थे. इसी पैसे से उन्होंने किसी प्रकार अपनी आगे की पढ़ाई पूरी की और आज टीचर की नौकरी मिली. उन्होंने कहा कि अब वे कड़ी मेहनत के सात सरकारी स्कूलों के बच्चों को पढ़ाएंगी, ताकि उनके जैसे गरीब वर्ग से आने वाले बच्चे भी आगे चलकर कुछ बन सकें.