क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ:सरकार की अफोर्डेबल हाउसिंग योजना खटाई में पड़ गई है. घोषणा के कई महीने बाद भी अब तक सरकारी जमीन के हस्तांतरण का कोई प्रावधान नहीं बन पाया है. इस कारण स्थानीय बिल्डर और निवासियों को रियायती दर पर जमीन का आबंटन नहीं हो पा रहा है. रिहायसी सोसाइटी और बहुमंजिली भवनों में सस्ती दर पर आवास उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने निजी निवेश आमंत्रित करते हुए राज्य की जनता के विकास की बात कही थी लेकिन राज्य में सरकारी जमीन के हस्तांतरण से संबंधित प्रावधान नहीं होने की वजह से बिल्डर इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं. सरकारी जमीन के हस्तांतरण का नियम लागू होने के बाद सरकार से लीज या फ्री होल्ड पर ली गई भूमि की खरीद-बिक्री की जा सकेगी. इससे राज्य में सबको आवास उपलब्ध कराने की अफोर्डेबल हाउसिंग योजना में तेजी आएगी.

समय सीमा का अभाव भी रोड़ा

सरकार ने अर्फोडेबल हाउसिंग के तहत फ्री होल्ड पर जमीन के आबंटन को स्वीकृति तो दी लेकिन योजनाओं को पूरा करने की समय सीमा तय नहीं की. इस समय सीमा के निर्धारण नहीं हो पाने के कारण लोगों में इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी अविश्वसनीयता है.

आवास बोर्ड के रवैये से असंतोष

राज्य आवास बोर्ड का निर्माण स्थानीय लोगों को रियायती दर पर आवास उपलब्ध कराने के लिए किया गया था लेकिन आवास बोर्ड द्वार निर्धारित कीमत संपत्ति के बाजार मूल्य से भी ज्यादा रखी जा रही है. इसको लेकर लोगों में काफी अंसतोष है. बोर्ड अपने चहेते बिल्डरों से काम कराने के लिए नियमों में कई तरह के बदलाव कर उन्हें लाभ पहुंचा रहा है लेकिन आम लोगों की जरूरतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा.

सांसद ने भी जताई आपत्ति

राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने भी झारखंड में अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए फ्री होल्ड जमीन दिए जाने की योजना की तारीफ तो की लेकिन इसकी खामियों की ओर भी सरकार का ध्यान आकृष्ट कराते हुए आपत्ति जताई है. अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए फ्री होल्ड पर सरकारी जमीन देने का फैसला बेहतर तभी हो सकता है, जब उसके साथ-साथ समय सीमा भी तय हो.

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कहती है पब्लिक

आवास बोर्ड द्वारा कराई गई लॉटरी में कई बार अनियमितता सामने आई है. बोर्ड द्वारा निर्धारित कीमत भी काफी अधिक रखी जाती है. सरकार की अफोर्डेबल हाउसिंग स्कीम की घोषणा के बाद लगा था कि अपना भी आशियाना बन पाएगा, लेकिन अभी तक इस क्षेत्र में कोई प्रगति दिखाई नहीं दे रही.

रवि शरण, रातू रोड

आवास बोर्ड को स्थानीय लोगों की जरूरतों से कोई मतलब नहीं है, बोर्ड केवल अपने चहेते ठेकेदारों को ही सारा फायदा पहुंचाना चाहता है. इसलिए लोगों को रियायती दर पर तो दूर बेहतर निर्माण के अनुसार भी कीमत तय कर मकान नहीं दे पा रहा. कई स्थानों पर बोर्ड द्वारा कराए गए निर्माण खाली पड़े हैं.

मनीष सिंह, किशोरगंज

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केवल योजना की घोषणा करने से काम खत्म नहीं हो जाता. इसके लिए जरूरी है कि टाइम बांड किया जाए और तय समय सीमा के भीतर बेहतर निर्माण कराकर लोगों को बसाया जाए, उन्हें आवास प्रदान किया जाए.

महेश पोद्दार

भाजपा सांसद