बंद की गई रफाह की सीमा
डॉक्टर्स सिंडिकेट के प्रमुख सलाह सल्लाम ने उत्तरी सिनाई में बताया कि विस्फोटक से लदी हुई एक कार ने उत्तरी सिनाई के शेख ज्यूऐद इलाके में सेना की जांच चौकी को सामने से निशाना बनाया है. हमले में 28 सैनिक मारे गए है वहीं 26 सैनिक घायल हो गए हैं. इस हमले को आतंकी हमला करार दिया गया है. वहीं आगे खतरे को भांपते हुए गाजा से लगने वाले रफाह की सीमा भी बंद कर दी गई है.

धमाके के बाद उग्रवादियों ने की गोलीबारी भी
मिस्र के निजी चैनल 'सीबीसी' के मुताबिक, जोरदार धमाके की आवाज सुनकर मिस्र के सैनिक अपने साथियों की मदद करने के लिए मौके पर भागे. इतने में अज्ञात उग्रवादियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी. विस्फोटकों की तलाश करने के लिए इलाके की घेराबंदी भी की गई थी. यही कारण था कि एंबुलेस को भी मौके पर पहुंचने के लिए इंतजार करना पड़ा. एक और हमले में गाजा से लगी सीमा के पास अल आरिश शहर में एक सैन्य जांच चौकी पर अज्ञात बंदूकधारियों की गोलीबारी में तीन और सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी.

आपात बैठक में लिया गया इमरजेंसी लगाने का फैसला
सैनिकों के मारे जाने के बाद अशांत उत्तरी सिनाई प्रांत में तीन माह के लिए इमरजेंसी की घोषणा की गई है. मिस्र के सरकारी टीवी की खबर के अनुसार, राष्ट्रपति अब्देल फतह अल सीसी ने एक आपात बैठक के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई. बैठक में इमरजेंसी लगाने का फैसला किया गया. इस दौरान अगले आदेश तक शाम पांच बजे से सुबह सात बजे तक रोज कर्फ्यू रहेगा.

उत्तरी सिनाई बना उग्रवादियों के हिंसक हमलों का गवाह
मिस्र में 2011 की क्रांति के बाद उत्तरी सिनाई उग्रवादियों के कई हिसंक हमलों का गवाह बना है. इस क्रांति में तत्कालीन राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक को सत्ता से बेदखल भी कर दिया गया था. पिछले साल जुलाई में पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी को सत्ता से हटाने के बाद से सिनाई स्थित अंसार बेत अल-मकदीस के उग्रवादियों ने पुलिस और सैन्य अधिकारियों पर हमले और भी तेज कर दिए हैं. उस दिन से 500 से भी ज्यादा सुरक्षाकर्मियों के मारे जाने की खबर है.

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