कानपुर। 4 दिसंबर 1977 को मुंबई में जन्में अजीत अगरकर भारत के बेहतरीन तेज गेंदबाजों में से एक रहे हैं। अपनी तूफानी गेंदों से विरोधी बल्लेबाजों को घुटनों पर लाने वाले अगरकर ने बल्ले से भी बड़े-बड़े कारनामे किए हैं। दाएं हाथ के इस गेंदबाज ने करीब 10 साल तक इंटरनेशनल क्रिकेट खेला। इस दौरान गेंद और बल्ले, दोनों से अगरकर ने शानदार प्रदर्शन किया।

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किया डेब्यू

अजीत अगरकर ने इंटरनेशनल क्रिकेट का आगाज साल 1998 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किया। यह वनडे मैच था जिसमें अगरकर ने एक विकेट लिया था। हालांकि पहले मैच में अगरकर भले ही यादगार परफाॅर्मेंस नहीं दे पाए मगर उन्हें लय में आने में ज्यादा वक्त नहीं लगा और करियर के तीसरे वनडे में ही कंगारुओं के खिलाफ चार विकेट झटककर अपनी काबिलियत का परिचय दे दिया।

सबसे तेज हॉफसेंचुरी जड़ने वाले भारतीय बल्लेबाज

अगरकर सिर्फ गेंदबाजी ही नहीं बल्लेबाजी के लिए भी जाने जाते थे। साल 2000 की बात है, उस वक्त अगरकर को डेब्यू किए दो साल ही हुए थे और इस छोटे से करियर में उन्होंने वो कारनामा कर दिखाया जिसे सचिन पूरी जिदंगी नहीं कर पाए। 2000 में जिंबाब्वे के खिलाफ एक मैच में अगरकर ने सबसे तेज अर्धशतक जड़ सबको हैरान कर दिया था। पांच मैचों की वनडे सीरीज का आखिरी मैच रजकोट में खेला गया। जिंबाब्वे ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला लिया। भारतीय टीम में सचिन, द्रविड़, सहवाग और युवराज जैसे धुरंधर बल्लेबाज थे। सभी को लगा कि भारत एक बड़ा स्कोर बना देगा, स्कोर तो बना लेकिन इन धुरंधर खिलाड़ियों के बल्ले से नहीं। उस वक्त भारतीय टीम में हेमंग बदानी खेला करते थे, कुछ लोगों ने यह पहली बार नाम सुना होगा। लेकिन बदानी ने इस मैच में 77 रन बनाए। इसके बाद क्रीज पर उतरे दो गेंदबाज आर सोढ़ी और अजीत अगरकर, सोढ़ी ने 53 रन बनाए लेकिन चर्चा तो हुई सिर्फ अगरकर की। इस तेज गेंदबाज ने मैच में 21 गेंदों में पचासा ठोंक दिया। यह रिकाॅर्ड आज तक बरकरार है।

वहां शतक लगाया जहां सचिन नहीं लगा पाए

अगरकर ने बल्ले से एक और कारनामा किया है, जो इतिहास के पन्नों में दर्ज है। लॉर्ड्स मैदान पर टेस्ट शतक जड़ने वालों में भले ही सचिन-विराट का नाम न हो, मगर इस लिस्ट में एक अजीत अगरकर जरूर शामिल हैं। क्रिकइन्फो के डेटा के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 349 विकेट अपने नाम करने वाले अगरकर ने साल 2011 में लॉर्ड्स में शतक जड़ा था। तब अजीत ने सातवें विकेट के लिए वीवीएस लक्ष्मण के साथ 126 रन की पार्टनरशिप कर शानदार नाबाद 109 रन बनाए थे। यह उनके अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का एकमात्र शतक है।

ऐसा रहा है इंटरनेशनल करियर

साल 2013 में क्रिकेट को अलविदा कहने वाले अजीत अगरकर ने भारत के लिए 191 वनडे खेले जिसमें 288 विकेट लिए और तीन अर्धशतक जमाए। वहीं टेस्ट की बात करें तो क्रिकेट के इस बड़े फाॅर्मेट में उन्हें ज्यादा खेलने को नहीं मिला। अगरकर ने 26 टेस्ट खेले जिसमें 58 विकेट अपने नाम किए। यही नहीं टेस्ट में एक शतक भी लगाया। वहीं टी-20 की बात करें तो इस गेंदबाज ने भारत के लिए चार टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले जिसमें 3 विकेट ही ले पाए।

Posted By: Abhishek Kumar Tiwari

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