याचिका निस्तारित, महानिबन्धक की अध्यक्षता में गठित कमेटी हर तीसरे महीने रिपोर्ट देगी

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कोर्ट के फर्जी आदेशों के मामले की निगरानी जनहित याचिका यह कहते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने निस्तारित कर दी है कि कोर्ट प्रशासनिक स्तर पर कार्यवाही करेगी. महानिबन्धक की अध्यक्षता में गठित कमेटी निगरानी कर रही है. कोर्ट ने कमेटी को हर तीसरे माह अपनी रिपोर्ट पेश करते रहने का निर्देश दिया है. ऐसे में जनहित याचिका कायम रखने का औचित्य नहीं है. यह आदेश चीफ जस्टिस गोविन्द माथुर तथा जस्टिस वाईके श्रीवास्तव की खण्डपीठ ने अमित रस्तोगी की याचिका पर दिया है. कोर्ट ने इस मामले से सम्बद्ध सभी अपीलों को अलग से सुनवाई करने का भी आदेश दिया है.

निचली अदालतों में दाखिल हुए फर्जी आदेश

बता दें कि हाईकोर्ट के जमानत के फर्जी आदेश अधीनस्थ न्यायालय में दाखिल हुए. इसकी जांच की गयी तो एक रैकेट का खुलासा हुआ जिसमें दलाल, वकील, मुंशी सहित कोर्ट के कुछ कर्मचारियों की संलिप्तता के चलते कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंप दी. जिन लोगों ने कोर्ट में फर्जी आदेश पेश किये थे, उन्हें गिरफ्तार किया गया. कई जगह छापों में कुछ मुंशी व दलाल भी जेल भेजे गये. इसी मामले में आरोपी अमित रस्तोगी ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ अपील दाखिल की. प्रशासनिक कमेटी की संस्तुति पर चीफ जस्टिस ने अपील को जनहित याचिका के रूप में कायम कर कई निर्देश जारी किये और फर्जी आदेशों पर नियंत्रण के लिए कमेटी गठित की गयी. आदेश की हाईकोर्ट से सत्यापन की व्यवस्था से जमानत के कई मामले पकड़े गये. वास्तविक अपराधी अभी भी पकड़ से बाहर हैं.