क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: सिटी के लोगों को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन सड़कों पर लगातार ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट शुरू कराने की तैयारी में है. क्रिसमस का त्योहार खत्म हो चुका है और नए साल के आगमन को लेकर सिटी पर उल्लास छाता जा रहा है. ऐसे में शहर की सड़कों पर दुर्घटनाओं में भी तेजी आई है. पिछले दो दिनों के भीतर राजधानी में 11 की संख्या में सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं. अधिकतर मामलों में चालक नशे में पाए गए, जिसे देखते हुए यह निर्णय लिया गया है.

पुलिस का अवेयरनेस कैंपेन

रांची पुलिस का कभी नारद, कभी यमराज तो कभी सांता क्लॉज बनकर सड़क पर उतरना सफल साबित नहीं हो रहा. पुलिस ने लोगों और युवाओं को ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूक बनाने के लिए तमाम प्रयास किए. लेकिन तेज रफ्तार का रोमांच पाने की ललक में युवा आज भी यातायात सुरक्षा नियमों को ठेंगा दिखाते सड़कों पर दिख जाते हैं. हालांकि ट्रैफिक पुलिस ने एनजीओ के साथ मिलकर सड़क सुरक्षा को लेकर कई अवेयरनेस कार्यक्रम चलाए, सड़कों पर सख्ती भी दिखाई, लेकिन इसका कोई खास असर युवाओं पर होता नहीं दिख रहा.

आंकड़े काफी हैं भयावह

सिटी की खून मांग रहीं सड़कों पर सुरक्षा के तमाम उपाय और चिन्हित ब्लैक स्पॉट फेल हो रहे हैं. सड़कों पर लोग महफू ज नहीं हैं. ट्रैफिक पुलिस के आंकडों की मानें तो साल 2017 में सिटी में कुल 745 हादसे हुए हैं. इनमें 437 लोग अपनी जान सड़क पर ही गंवा बैठे. साल 2018 में भी अब तक रोड एक्सीडेंट में मृतकों की संख्या करीब 400 पार कर चुकी है.

5 ब्लैक स्पॉट चिन्हित

सड़क सुरक्षा समिति ने खेलगांव मोड़ से बूटी मोड़ होते हुए बीएसएनएल, जुमार पुल, बीआईटी मोड़ और विकास विद्यालय के समीप करीब पांच ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए हैं. परिवहन विभाग की ओर से यहां रम्बल स्ट्रिप तथा साइनेज लगाने का निर्णय लिया गया है, लेकिन कई ब्लॉक स्पॉट प्लेस पर यह फार्मूला फेल हो चुका है.

वर्जन

जागरुकता अभियान के जरिए लोगों को अवेयर किया गया तो जनवरी 2018 से सितम्बर 2018 के बीच लोगों से करीब दो करोड़ रुपए से ज्यादा फाइन भी वसूला गया. बावजूद इसके रफ्तार के चलते सड़क हादसों में कमी नहीं आ रही है.

रंजीत कुमार लकड़ा, ट्रैफिक डीएसपी