मुजफ्फरपुर (एएनआई)। बिहार सरकार ने डाक विभाग की मदद से सोमवार से चुनिंदा जिलों में मुजफ्फरपुर की फेमस 'शाही लीची' की होम-डिलीवरी शुरू कर दी है। अधिकारियों ने कहा है कि इस फल के सेवन से शरीर को कोई नुकसान नहीं पहुंचता है। बता दें पिछले साल बिहार में एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) बीमारी ने कई बच्चों की जान ले ली थी। उस वक्त कहा जा रहा था कि लीची खाने से बच्चे बीमारी पड़े थे। उसके बाद इस फल के सेवन को लेकर सवाल खड़े हो गए थे।

फल का बीमारी से कोई लेना-देना नहीं

मुजफ्फरपुर के सिविल सर्जन डॉ शैलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि फलों के सेवन और एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) बीमारी के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया है, जिसने पिछले साल राज्य में कई बच्चों की जान ले ली थी। सिंह ने यहां एएनआई को बताया, "फल और एईएस बीमारी के बीच कोई संबंध नहीं है, जो मैंने देखा है। एईएस से प्रभावित बच्चों के मामले जनवरी-फरवरी से आने शुरू हो गए थे।"

लीची खाने से मजबूत होता है इम्यून सिस्टम

इस बीच, लीची अनुसंधान केंद्र के निदेशक डॉ विशाल नाथ ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगा और कहा कि यह फल वास्तव में लोगों का इम्यून सिस्टम मजबूत करने में सहायक होता है। नाथ ने कहा, "यह बिहार सरकार का एक बहुत ही सकारात्मक कदम है, जो किसानों के लिए और खरीदारों के लिए भी फायदेमंद साबित होगा, साथ ही वे उत्पाद की होम-डिलीवरी कर पाएंगे।" उन्होंने आगे बताया, ' शोध ने स्पष्ट किया था कि फल किसी भी तरह से एईएस बीमारी से जुड़ा नहीं है। लीची में ऐसा कुछ भी नहीं है जो किसी को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर सके। इसके अलावा, एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन-सी, कैल्शियम, फास्फोरस, ओमेगा -3, अन्य को बढ़ावा देने में मदद करेगा। प्रतिरक्षा प्रणाली, जो COVID-19 महामारी के खिलाफ लड़ाई में काम आएगी।'

आम की डिलीवरी जून में

शाही लीची की होम डिलीवरी आज से शुरू हो गई, जबकि भागलपुर के आम की एक प्रतिष्ठित किस्म 'जरदालु आम' जून से शुरू होगी। इससे पहले आज, संचार मंत्रालय ने कहा था कि लीची के 4,400 किलोग्राम के ऑर्डर पहले ही रखे जा चुके हैं और उम्मीद है कि सीजन के दौरान यह 1 लाख किलोग्राम तक जाएगा।

Posted By: Abhishek Kumar Tiwari

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