कहानी :
अन्नी का बेटा इंजीनिरिंग एंट्रेंस पास न कर पाने की ग्लानि में सूइसाइड अटेम्प्ट करता है और उसको सीख देने के लिए अन्नी उसे अपने कॉलेज दिनों की कहानी सुनाता है।

समीक्षा :
थ्री इडियट्स और जो जीता वही सिकंदर से प्लॉट बॉरो करके नीतीश आपको एक नॉस्टैल्जिक दुनिया मे ले जाते हैं और आपका खूब मनोरंजन करते हैं। इस फ़िल्म के किरदार वैसे ही हैं जैसे हमने अपने कॉलेज में देखे होंगे, यही इस फ़िल्म का सबसे बड़ा हाई पॉइंट है और इसके फेवर में काम करता है। ये कॉलेज स्टूडेंट ऑफ द ईयर के स्कूल की तरह किसी और दुनिया का नहीं है, इसमे पढ़ने वाले नर्ड स्टूडेंट रियल हैं। आर्ट डिरेक्शन ऑन पॉइंट है, फिल्म में विलुप्त हो चुके गोल्ड स्पॉट और कैम्पा कोला भी दर्शन देते हैं। कॉस्ट्यूम भी ठीक ठाक हैं। डायलॉग बढ़िया हैं और फिल्म की मेसेजिंग भी बढ़िया है। फिल्म बोर नहीं करती और ओवर आल फील गुड है। नॉस्टैल्जिया इस फिल्म की मेन लीड है और वही फिल्म को देखने लायक बनाती है।

 

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 क्या है प्रॉब्लम :
1. प्रेडिक्टेबल है
2. अगर श्रद्धा के करैक्टर को भिंडी की सब्जी ही बनाते दिखाना था तो इंजीनियरिंग स्टूडेंट दिखाने की क्या जरूरत थी, अगर अन्नी को सिंगल पैरेंट भी दिखा देते तो फिल्म पर कोई खास असर नही पड़ता।
3. फिल्म में प्रोस्थेटिक मेकअप का काम बेहद खराब है।

अदाकारी :
श्रद्धा का रोल बहुत ही खराब लिखा हुआ है इस कारण उनके करने के लिए फ़िल्म में ज्यादा कुछ नहीं है। सुशांत भी अपने किरदार में काफी अनकम्फर्टेबल से नज़र आ रहे थे। इस फिल्म में सबसे यादगार जो किरदार हैं वो बाकी सभी छिछोरों के हैं, वरुण शर्मा , ताहिर राज भसीन, नवीन पॉलीशेट्टी, सहर्ष शुक्ला समेत बाकी पूरी कास्ट अपने अपने किरदारों को ठीक से निभाती है और मेन लीड पेयर से ज्यादा तालियां बटोरती हैं। खासकर वरुण का किरदार याद रह जाता है। प्रतीक बब्बर बहुत ही क्यूट हैं और विलेन के तौर पे ज्यादा बिलिवेबल नहीं लगते।

वर्डिक्ट :
अच्छी फिल्म है, नॉस्टैल्जिक है, इसकी मेसेजिंग अच्छी है इसलिए एक बार जरूर देखी जा सकती है।

रेटिंग : 3.5 स्टार

बॉक्स ऑफिस प्रेडिक्शन : 50 से 60 करोड़

Review by: Yohaann Bhaargava

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