वाराणसी (ब्यूरो)।  दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने हिंदी दिवस के एक दिन पहले शुक्रवार को देश के नामी शिक्षण संस्थानों में हिंदी के स्टूडेंट्स के शब्द ज्ञान को परखा। इस दौरान जो स्थिति दिखी, वह चौकाने वाली है। जिस मिट्टी में खेलकूद कर कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद्र और खड़ी बोली हिंदी के जनक भारतेंदु हरिश्चंद्र हुए। जिन्होंने हिंदी को एक नया मुकाम दिया। उनकी लेखनी को सदियों तक पढ़ी जाएगी। उस हिंदी में रचे-बसे शहर की युवा पीढ़ी हिंदी के पांच शब्द भी शुद्ध नहीं लिख सकी। खास ये रहा कि फेल होने वालों में ग्रेजुएशन और मास्टर ही नहीं हिंदी के रिसर्च स्कॉलर भी रहे।

अंग्रेजी के शब्द बताइये तो लिख दूंगा

हिंदी के सामान्य और बोलचाल के कुछ शब्दों को स्टूडेंट्स से लिखवाने हम सबसे पहले हमने मैदागिन स्थित हरिश्चंद्र पीजी कालेज पहुंचे। इस कॉलेज का नाम भारतेंदु हरिश्चंद्र के नाम पर ही है। यहां हम हिन्दी विभाग पहुंचे जहां हमें स्टूडेंट्स तो नहीं मिले हां हेड हेड ऋचा सिंह मौजूद थीं। उन्हें हिंदी दिवस की याद दिलाते हुए हमने पांच स्टूडेंट्स से हिंदी के कुछ शब्द लिखवाने का रिक्वेस्ट किया।

मोबाइल से कर रहे थे नकल

आग्रह को मानते हुए हमें अपने साथ लेकर क्लासरूम में गयीं तो एक छात्र मोबाइल में नजरें गड़ाये था। उस छात्र से हम लोगों ने हिंदी के कुछ शब्द लिखने को कहा तो सीधे ये कहते हुए इनकार कर दिया कि यदि इंग्लिश के शब्द लिखना हो तो बताइये हिंदी मुझे नहीं आती। हिंदी के प्रति उसकी समझ और उदासीनता से हम लोगों से ज्यादा मैडम क्षुब्ध दिखीं। यहां से हमें ग्राउंड में लेकर गयीं यहां काफी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थीं।

छात्रों का लग गया मजमा

बतौर रिपोर्टर हम लोगों का उनके बीच परिचय कराया तो छात्रों का मजमा लग गया। उसमें कई सारे नेताजी भी थे। हलांकि जब हमने कुछ छात्रों से शब्द लिखने को कहा तो भीड़ अपने आप छंट गयी। एक-एक कर पांच छात्र-छात्राओं ने हमारे बोले पांच शब्द लिखे। पर अफसोस की किसी ने सही शब्द नहीं लिखा। गलती भी छोटी नहीं, बल्कि ब्लंडर थी। ये स्टूडेंट्स किसी निचली कक्षा के नहीं थे बल्कि कोई एम कर रहा है तो किसी का बीए लास्ट ईयर है। पर आप सोच सकते हैं कि हिंदी कितना जानते हैं।

बीएचयू के स्टूडेंट्स हुए पास

हरिश्चंद्र पीजी कालेज के बाद हम मालवीय जी की बगिया काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के हिंदी डिपार्टमेंट पहुंचे। यहां हमने गेट पर ही शोधार्थी और एमए के पांच स्टूडेंट्स से हिन्दी के पांच-पांच शब्द लिखवाया। खास ये रहा कि यहां के लगभग सभी स्टूडेंट्स ने बिल्कुल शुद्ध शब्द लिखे। इन स्टूडेंट्स में न केवल आत्म विश्वास दिखा बल्कि हिंदी के प्रति सम्मान भी झलका।

रिसर्च स्कॉलर नहीं लिख सके शुद्ध

बीएचयू के बाद हम काशी विद्यापीठ पहुंचे। यहां भी हिंदी डिपार्टमेंट पहुंच गये। जहां विभाग हेड अनुराग कुमार कुछ टीचरों से बातचीत कर रहे थे। उनसे इजाजत लेकर मैंने हिन्दी पर चर्चा की और कुछ स्टूटेंड्स से हिन्दी के कुछ शब्द लिखवाने का रिक्वेस्ट किया। उन्होंने चार स्टूटेंड्स बुलाये। सभी रिसर्च स्कॉलर थे। हमने उनसे हिन्दी के पांच शब्द लिखने को कहा। दो शोधार्थियों ने सही लिखा, जबकि दो के शब्दों में गलतियां मिलीं।

ये शब्द था लिखना

पुनर्नवा, वेशभूषा, प्रज्ज्वलन, आशीर्वाद, षडय़ंत्र

स्टूडेंट्स ने ये लिखा

श्रंयत्र, वेषभूशा, सणयन्त्र, संयत्र, आशिर्वाद, पूर्ननवा, वेषभूषा, प्रज्वलन

VARANASI@inext.co.in

Posted By: Inextlive