- दैनिक जागरण आई नेक्स्ट के ग्रुप डिस्कशन में कमेटी बनाकर अवेयरनेस प्रोग्राम चलाने का फैसला

- स्कूलों में जाकर वॉटर की अहमियत बताने के साथ बताए जाएंगे बर्बादी रोकने के तरीके

GORAKHPUR: पानी है तो जिंदगानी है. अब देश के फ्यूचर भी पानी की बर्बादी को रोकने के लिए कदम बढ़ाएंगे. दैनिक जागरण आई नेक्स्ट की मुहिम 'वॉटर माफिया' के आखिरी फेज में ग्रुप डिस्कशन ऑर्गनाइज किया गया. इसमें देश की रिनाउंड पर्सनालिटीज ने हिस्सा लिया और पानी बचाने के तरीके शेयर किए. इस दौरान सभी ने सहमति से एक कमेटी फॉर्म करने का भी फैसला किया, जो स्कूल खुलने के बाद सभी स्कूलों में जाकर बच्चों को पानी बचाने के लिए अवेयर करेगी. इसके लिए मेगा प्लानिंग होगी और ऑडियो-विजुअल भी तैयार किया जाएगा. वीक या दो वीक में एक दिन स्कूल का शेड्यूल होगा, जहां एक्सप‌र्ट्स बच्चों को पानी की अहमियत बताएंगे, जिससे कि वह अभी से पानी की परवाह करें और आने वाले वक्त में उन्हें पानी की किल्लत से जूझना न पड़े.

अब करने की बारी है

मुहिम की शुरुआत से अब तक दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने अपने रीडर्स को यह बताया कि किस तरह हमारे पीने का पानी रोजाना नालियों में बह जा रहा है. कैसे लोग चंद पैसों के लिए लाखों लोगों के हिस्से का पानी बर्बाद कर दे हैं. वहीं मुहिम के दौरान यह भी बताया गया कि एक आदमी को एक दिन में कितने पानी की जरूरत होती है और वह कितना बर्बाद कर डालते हैं. अब नेक्स्ट फेज में बारी इसे बचाने की है, जिसके लिए कमेटी तो अपना काम करेगी ही, वहीं अब लोगों को भी अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में पानी की बर्बादी को रोकने के लिए पहल करनी होगी, जिससे कि आने वाली जनरेशन को पानी की किल्लत से जूझना न पड़े.

हाईलाइट्स

शहर में प्रति व्यक्ति पानी की जरूरत - 135 लीटर

गोरखपुर की अनुमानित जनसंख्या - 10 लाख

इसके हिसाब से पानी की जरूरत - 135 मिलियन लीटर

जलकल से वॉटर सप्लाई - 112 एमएलडी

घरों में अपनी व्यवस्था से सप्लाई - 11 एमएलडी

पानी की जरूरत - 12 एमएलडी

कोट्स

हर घर में वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना मस्ट कर देना चाहिए. घरों में छोटे ही सही वॉटर टैंक बनें जिससे पानी की बर्बादी को रोका जा सके.

- डॉ. नरेंद्र मिश्रा, शिक्षक

आरओ वॉटर में पानी की काफी बर्बादी होती है. लोग खराब समझकर इसे नाली में बहा देते हैं. मगर यह पानी दूसरी जगहों पर इस्तेमाल हो सकता है. इसके लिए अवेयरनेस कैंपेन चलाया जाना चाहिए.

- डॉ. गौरांग श्रीवास्तव, डेंटिस्ट

अवेयरनेस के मामले में तो हम शिक्षित हैं लेकिन इसको अमल में नहीं लाते हैं. टोटी खुली है, इसे हम देखते हैं और आगे बढ़ जाते हैं. इस सोच को बदलना होगा.

- अजय सिंह, बिजनेसमैन

डीफॉरेस्टेशन काफी तेजी से हो रहा है. इसमें कंक्रीटाइजेशन भी कर दिया जा रहा है. जिससे वॉटर रीचार्ज बिल्कुल बंद हो गया है. हर कॉलोनी में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि कुछ एरिया ऐसा हो जहां से वॉटर रीचार्ज किया जा सके.

- अचिंत्य लाहिड़ी, बिजनेसमैन

फ्लश करने में लाखों लीटर पानी बर्बाद कर दिया जा रहा है. वॉटर लीकेज भी आम है. वॉटर क्वालिटी इंडेक्स में देश 122 में से 120वें नंबर पर पहुंच चुका है. अगर इसे रोका नहीं गया तो पानी की किल्लत फेस करनी पड़ेगी.

- डॉ. शोभित श्रीवास्तव, रिसर्च स्कॉलर

सबसे पहले हमें अपने आप से ही शुरुआत करनी होगी. डेली रूटीन में ब्रश करना हो तो टैप तभी ओपन करें, जब मुंह धुलना हो, वरना ब्रश करते वक्त टैप बंद रखें, इससे ही काफी पानी की बचत होगी.

- अभिषेक सिंह, सोशल वर्कर

अवेयरनेस प्रोग्राम चलाकर लोगों को पानी की बर्बादी रोकने के लिए मोटीवेट किया जाना चाहिए. इससे सभी नहीं अगर 20 परसेंट भी लोग अवेयर हो गए, तो हम हजारों लीटर पानी को बर्बाद होने से बचा सकते हैं.

- राहुल, बिजनेसमैन

देश में कई जगह पानी की किल्लत है. वहां पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है. हमें देश के उन हिस्सों को देखकर सीख लेनी चाहिए और पानी की बचत करनी चाहिए.

- चंद्रकेश निगम, व्यापारी

इसकी शुरुआत हम अपने घर से ही करेंगे. जितना भी पॉसिबल होगा, पानी बचाएंगे. अगर इस मुहिम में हमसे कोई भी सहयोग चाहिए होगा, हम उसे करने के लिए तैयार हैं.

- राजेश नेभानी, अध्यक्ष, थोक वस्त्र व्यवसायी वेलफेयर सोसायटी

पहले वॉटर रीचार्ज के लिए जलाशय, कुआं, झील हुआ करती थी, जो अब बिल्कुल खत्म हो चुकी हैं. वहीं पौधे जो वॉटर सिंथेसिस और वॉटर साइकिल के जरिए पानी की किल्लत को दूर करते थे, अब उन पेड़ों की कटान होने लगी है. इससे ही वॉटर लेवल नीचे जा रहा है. हमें पानी का लेवल मेनटेन रखना है, तो पौधे लगाने होंगे.

- डॉ. वीएन पांडेय, शिक्षक

एक्ट में पानी का दोहन रोकने के लिए प्राविधान हैं, लेकिन यहां सिर्फ कागजों में रूल है, इसका कोई पालन नहीं होता है. लोग बेतहाशा पानी बर्बाद कर रहे हैं, जिससे फ्यूचर में हमें पानी की किल्लत झेलनी पड़ सकती है.

बृजेश त्रिपाठी, प्रोफेशनल

गोरखपुर के आसपास करीब 393 किलोमीटर का रीवर पाथ है. इसमें घाघरा, रोहिन और राप्ती जैसी नदियां बहती हैं. अगर इनके पानी की डी सिल्टिंग की जाए, तो इससे काफी हद तक ग्राउंड वॉटर को रीचार्ज किया जा सकता है. वहीं कॉम्प्लेक्स बनाने वाले काफी डीवॉटरिंग कर रहे हैं, लेकिन हजारों लीटर पानी बहा दे रहे हैं. इन्हें सख्ती के साथ रूल फॉलो करने के लिए बाध्य करना चाहिए.

- गौतम गुप्ता, प्रोजेक्ट मैनेजर, डीडीएमए

गोरखपुर में अब ड्रिंकिंग वॉटर की क्राइसिस बढ़ने लगी है. तय सीमा से ज्यादा हम इस्तेमाल कर ले रहे हैं, वहीं उसके बराबर तो दूर उसका आधा भी रीचार्ज नहीं हो पा रहा है. इससे वॉटर लेवल नीचे जा रहा है. वहीं डीफॉरेस्टेशन से भी वॉटर लेवल घट रहा है. मानकों के हिसाब से शहर में फॉरेस्ट कवर 33 परसेंट होना चाहिए, जबकि गोरखपुर का फॉरेस्ट कवर अब महज 3.3 परसेंट ही बचा हुआ है.

- प्रो. गोविंद पांडेय, एनवायर्नमेंटलिस्ट

ऐसे होगी पानी की बचत

- आर्टिफिशियल रीचार्ज करने के लिए घरों और संस्थानों में हो व्यवस्था

- कॉम्प्लेक्स जहां डीवॉटरिंग हो रही हैं, उनसे सख्ती के साथ रूल्स फॉलो कराया जाए और पानी निकालने से पहले ही रीचार्ज वेल बनवा लिया जाए.

- बच्चों के हाथ में ही देश का फ्यूचर है, इसलिए पहले बच्चों को ही इस मुहिम से जोड़ा जाए, तभी फ्यूचर में पानी की बर्बादी को कम किया जा सकता है.

- आरओ सिस्टम लगाने वालों के लाइसेंस की जांच करने के बाद ही परमिशन देनी चाहिए, वहीं उनके लिए डेली वॉटर यूज की लिमिट तय होनी चाहिए.

- घर में गाड़ी की धुलाई करें और पाइप की जगह बाल्टी और मग का इस्तेमाल करें.

- जिस पानी से बर्तन, कपड़े आदि धोए जा रहे हैं, उसके री-साइकिल की व्यवस्था करें और पहले इसी से धुलाई करें.

- आखिर में इसे एक बाल्टी साफ पानी से धो दें.

- वॉटर की वेस्टेज को कम करने और उसे सेफ करने का सबसे बेहतर तरीका है, अवेयरनेस. अगर लोग पानी के वेस्टेज से होने वाले खतरे से आगाह हो गए और उन्हें इस बात का अहसास हो गया कि हम जो कर रहे हैं, उससे क्या प्रॉब्लम हो सकती है, तो वॉटर वेस्टेज को कुछ हद तक रोका जा सकता है.

- घर-घर जाकर, नुक्कड़ नाटक, एड, पोस्टर और बैनर के थ्रू पानी के वेस्टेज को काफी हद तक कम किया जा सकता है.