14700 संविदा ड्राइवर प्रदेश में

19253 संविदा कंडक्टर प्रदेश में

6039 रेग्युलर ड्राइवर प्रदेश में

5181 रेग्युलर कंडक्टर प्रदेश में

1585 ड्राइवर्स के पद खाली

- मैग्ना कंपनी ने परिवहन निगम को प्रोवाइड कराया था ड्यूटी सॉफ्टवेयर

- ड्राइवर और कंडक्टर की डयूटी अपने आप लग जाती थी

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LUCKNOW: परिवहन निगम में बसों के रखरखाव में ही नहीं संविदा ड्राइवर और कंडक्टर की ड्यूटी में भी खेल किया जा रहा है. उन्हीं संविदा ड्राइवर्स और कंडक्टर्स से ड्यूटी कराई जा रही है, जो ड्यूटी लगाने वाले बाबू को चढ़ावा चढ़ाते हैं. जो चढ़ावा नहीं चढ़ाते हैं, उन्हें ड्यूटी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है. इस सिस्टम को खत्म करने के लिए रोडवेज ने ड्यूटी सॉफ्टवेयर लागू किया था जिसे दो साल में ही बंद कर दिया गया. बाबुओं ने इस सॉफ्टवेयर को सही नहीं बताया था.

बाबू लगाते हैं ड्यूटी

सभी डिपो पर संविदा ड्राइवर और कंडक्टर की ड्यूटी लगाने के लिए एक बाबू की व्यवस्था है. जो ड्राइवर और कंडक्टर इन्हें चढ़ावा चढ़ाते हैं, उन्हें बराबर ड्यूटी मिलती रहती है. जुगाड़ वाले ड्राइवर और कंडक्टर अधिक कमाई के चलते बिना रेस्ट के बस चलाते हैं जिससे हादसे का भी डर बना रहता है.

गायब हो गया सॉफ्टवेयर

रोडवेज के अधिकारियों के अनुसार बाबू की ड्यूटी लगाने की व्यवस्था खत्म करने के लिए दो साल पहले ड्यूटी सॉफ्टवेयर प्रदेश में लागू किया गया था. मैग्ना कंपनी ने यह सुविधा उपलब्ध कराई थी. इससे संविदा ड्राइवर्स और कंडक्टर्स को डयूटी बाबू के हाथ-पैर नहीं जोड़ने पड़ते थे. सॉफ्टवेयर खुद ड्यूटी अलॉट कर उनके मोबाइल में एसएमएस भेजता था. इससे डयूटी लगाने वाले बाबुओं की कमाई प्रभावित होने लगी और उन्होंने सॉफ्टवेयर में कई तरह की समस्या दिखाकर इसे बाहर करा दिया. आलम यह है कि सॉफ्टवेयर लगाने वाली कंपनी का बकाया अभी भी परिवहन निगम पर है. वहीं दुर्घटना के बाद एक बार फिर से अधिकारियों को इसकी याद आई है.

संविदा ड्राइवर्स ज्यादा

निगम के अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में रोडवेज की बसों के पहिए संविदा ड्राइवर्स और कंडक्टर्स की बदौलत ही घूम रहे हैं. रेग्यूलर्स के मुकाबले इनकी संख्या कहीं अधिक है. संविदा ड्राइवर्स और कंडक्टर्स को प्रति किमी के अनुसार एक रुपए 36 पैसे का भुगतान होता है. रेग्यूलर ड्राइवर ड्यूटी पर न जाएं फिर भी उनका वेतन बनता है.

कोट

ड्राइवर और कंडक्टर की ड्यूटी के लिए ड्यूटी सॉफ्टवेयर लाया जाएगा. उनकी छुट्टियों का ख्याल भी यही सॉफ्टवेयर रखेगा.

धीरज साहू, एमडी

परिवहन निगम