-समीक्षा के दौरान दिए तर्को से फंस गई आरबीएसके टीम

-सामने आई पांच सीएचसी की खराब परफॉर्मेस, थमाई नोटिस

PRAYAGRAJ: क्या आप कभी सोच सकते हैं कि कोई डॉक्टर 90 मिनट में 90 मरीजों को देख सकता है. ऐसा कारनामा करने का दावा किया है होलागढ़ सीएचसी की टीम ने. हालांकि क्रॉस चेकिंग में यह दावा पूरी तरह से फेक साबित हुआ. उच्च अधिकारियों ने शक के आधार पर झूठ पकड़ लिया. सीनियर्स को फेक जानकारी देने सहित लापरवाही बरतने पर पांच अलग-अलग सीएचसी के डॉक्टर्स को नोटिस थमाई गई है. पूरा मामला राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़ा है.

महंगा पड़ा ओवरस्मार्ट बनना

शासन के आदेश पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है. इसके तहत जिले की 20 सीएचसी को मिलाकर कुल 40 टीमें बनाई गई हैं. इनका काम स्कूलों में जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करना है. लंबे समय से होलागढ़, सैदाबाद, जसरा, मांडा और धनुपुर की परफॉर्मेस खराब जा रही थी. गुरुवार शाम स्वयं सीएमओ ने टीमों को बुलाकर समीक्षा की तो होलागढ़ के डॉक्टर्स अधिक स्मार्ट बनने के चक्कर में फंस गए. उनका तर्क था कि वह 12 बजे स्कूल के भीतर गए और दोपहर 1:30 बजे बाहर आ गए. इस बीच उन्होंने 90 बच्चों का हेल्थ चेकअप भी किया.

इन्होंने नहीं किया एप का पूरा उपयोग

कार्यक्रम के बेहतर संचालन के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक एप भी लांच किया गया है. इसे मोबाइल फोन पर इंस्टॉल किया जाता है. इसमें डॉक्टर द्वारा स्कूल में इंटर करते समय बटन को दबाया जाता है. ऐसा करने से डॉक्टर की स्कूल में जाते समय फोटो और टाइमिंग दर्ज हो जाती है. फिर स्कल के एग्जिट करते समय फिर इस एप के बटन को दबाना पड़ता है. इससे क्लियर हो जाता है कि टीम ने सकूल में कितना समय बिताया है. जांच में पाया गया कि मांडा की टीम ने स्कूल में एंट्री का टाइम ही नहीं डाला थ. धनुपुर की टीम ने मोबाइल पर यह एप ही डाउनलोड नही किया. जसरा के डॉक्टर्स ने भी एप डाउनलोड नहीं किया. सीएमओ ने उनकी सेवा समाप्ति की संस्तुति कर दी है.

वर्जन..

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत समीक्षा के दौरान पांच सीएचसी की टीमों का कार्य संतोषजनक नहीं पाया गया. यह लोग एप का उचित उपयोग नहीं कर रहे थे. साथ ही गलत जानकारी दी जो सामने आ गई. सभी को लापरवाही बरतने पर नोटिस और चेतावनी दी गई है. एक डॉक्टर की सेवा समाप्ति के लिए भी लिखा गया है.

-डॉ. मेजर गिरिजाशंकर बाजपेई, सीएमओ, प्रयागराज