-ई-कॉमर्स मार्केट में पर हैं ई-सिगरेट

-गवर्नमेंट ने लगाई है पाबंदी, लेकिन खुलेआम बिक रही है सिगरेट

-ऑर्डर पर घर तक पहुंच जा रही है ई-सिगरेट

GORAKHPUR: धुएं का छल्ला बनाकर उड़ाना यंगस्टर्स का पुराना शौक है. वक्त के साथ यह अपग्रेड हुआ और कागजों की सिगरेट की जगह इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट ने ले ली है. लगातार मिल रहे इसके निगेटिव रिजल्ट को देखते हुए अब गवर्नमेंट ने इस पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी है. इसकी सेल को रोकने के लिए अब प्लानिंग भी शुरू हो गई है. मगर ई-कॉमर्स मार्केट में न तो निगरानी है और न ही इसकी रोक का असर ही नजर आ रहा है. देश-दुनिया की ब्रांडेड सिगरेट एक क्लिक और ऑर्डर पर अवेलबल है, जो सीधे लोगों के घर पहुंचाई जा रही है. गवर्नमेंट के लिए अब सबसे बड़ा चैलेंज यही ई-कॉमर्स मार्केट हैं, जहां बैन के बाद भी धड़ल्ले से सिगरेट बेची जा रही है.

सभी ई-कॉमर्स पर सिगरेट मौजूद

ई-सिगरेट भले शहर में चोरी चुपके से बिक रही हों, लेकिन ई-कॉमर्स पोर्टल पर इसकी सेल धड़ल्ले से की जा रही है. क्00 रुपए से लेकर कई हजार रुपए तक की ई-सिगरेट इन पोर्टल पर अवेलबल है. ऑनलाइन सामान को सेल करने वाली लगभग सभी वेबसाइट पर यह सिंगल क्लिक पर अवेलबल है. इंडिया में इसकी सेल, परचेज, यूज और स्टोर करने पर पाबंदी लगाई गई है. पहली बार पकड़े जाने पर एक साल तक की सजा या एक लाख रुपए जुर्माना या दोनों हो सकते हैं और दोबारा पकड़े गए तो फ् साल की सजा और पांच लाख रुपए जुर्माना वसूल किया जाएगा. लेकिन इन वेबसाइट पर कैसे रोक लगेगी, इसके लिए कोई नोटिफिकेशन नहीं है.

आखिर क्या है इर्-सिगरेट?

ई-सिगरेट बैटरी ऑपरेटेड एक डिवाइस है, जिनमें लिक्विड भरा रहता है. निकोटीन और दूसरे हार्मफुल केमिकल्स का सॉल्युशन इसमें इस्तेमाल किया जा रहा है. जब कोई व्यक्ति ई-सिगरेट का कश लेता है तो हीटिंग डिवाइस इसे गर्म करके वेपर में तब्दील कर देती है, इसीलिए इसे स्मोकिंग की जगह वेपिंग कहा जा रहा है. निकोटीन की बात करें तो यह ऐसा नशीला पदार्थ है, जिसकी लत लग जाती है. इसलिए हार्ट पेशेंट को खासतौर पर इससे दूर रहने की जरूरत है. रिसर्च में यह बात सामने आई है कि दिल की धमनियों को यह कमजोर कर देता है. इसकी लत पड़ जाती है इसलिए इसे छोड़ने पर विदड्रॉल सिंड्रोम और डिप्रेशन की प्रॉब्लम हो सकती है.