कानपुर। Farokh Engineer Birthday 25 फरवरी 1938 को मुंबई में जन्में फारुख मानेकशॉ इंजीनियर भारत की तरफ से इंटरनेशनल क्रिकेट खेलने वाले आखिरी पारसी क्रिकेटर हैं। फारुख के बाद कोई पारसी टीम इंडिया में नहीं आ सका। हालांकि फारुख लकी रहे जो उन्हें भारत के लिए खेलने का मौका मिला। दाएं हाथ के इस विकेटकीपर बल्लेबाज ने भारत के लिए 46 टेस्ट और 5 वनडे खेले हैं। 14 साल लंबे करियर में फारुख ने ज्यादा रन तो नहीं बनाए मगर अपनी शानदार विकेटकीपिंग से लोगों का दिल खूब जीता।

लगाए हैं सिर्फ दो शतक

साल 1961 में इंटरनेशनल डेब्यू करने वाले फारुख ने करीब डेढ़ दशक तक क्रिकेट खेला। हालांकि इस दौरान उन्होंने सिर्फ दो इंटरनेशनल शतक लगाए और यह दोनों शतक टेस्ट मैच में आए। इसके अलावा टेस्ट में उनके नाम 16 हॉफसेंचुरी भी दर्ज हैं। फारुख ने 46 मैच खेलकर 31.08 की औसत से 2611 रन भी बनाए हैं। टेस्ट में फारुख का हाईएस्ट स्कोर 121 रन है। वहीं वनडे की बात करें तो इस खिलाड़ी को सिर्फ पांच वनडे खेलने को मिले जिसमें कुल 114 रन बनाए। वनडे में फारुख के नाम सिर्फ एक फिफ्टी है।

भाई के चलते सीखी विकेटकीपिंग

फारुख इंजीनियर के विकेटकीपर बनने में उनके भाई डेरियस का अहम रोल रहा। इस बात का जिक्र खुद फारुख ने किया था। फारुख के मुताबिक, उनका भाई ऑफस्पिनर था। एक क्लब मैच के दौरान टीम का विकेटकीपर नीचे की गेंद नहीं पकड़ पा रहा था तब हताशा में डेरियस ने फारुख को बतौर विकेटकीपर टीम में रख लिया। फिर क्या फारुख गेंद को अच्छे से कलेक्ट कर रहे थे और उन्होंने कुछ स्टंपिंग भी की। इसके बाद भारत को फारुख के रूप में उस वक्त का बेहतरीन विकेटकीपर मिला।

फारुख का क्या है निकनेम

भारतीय क्रिकेटर फारुख इंजीनियर का एक निक नेम भी है। उन्हें इंग्लैंड में लोग रूकी के नाम से जानते हैं। फारुख को ये निक नेम फ्रेड ट्रूमैन ने दिया था।

उड़ाया है हवाई जहाज

फारुख को फ्लाइंग का काफी शौक है। इसके लिए उन्होंने बकायदा ट्रेनिंग भी ली। एक बार फारुख ने बताया था कि वह पाइपर चेरोक और टाइगर मॉथ जैसे छोटे हवाई जहाज उड़ा चुके है। फारुख के मुताबिक, उन्होंने कभी ज्यादा ऊंची उड़ान नहीं भरी। यही नहीं फारुख को साइकिलिंग का भी शौक था। एक बार वह दोस्त संग मुंबई से पूना तक साइकिल से घूम कर आए थे। इस दौरान उन्होंने करीब 400 किमी तक साइकिल चलाई।

क्रिकेटर बनकर भी करते थे नौकरी

आपको जानकर काफी आश्चर्य होगा कि इंटरनेशनल क्रिकेटर बनने के बावजूद फारुख इंजीनियर नौकरी करते थे। मुंबई में वह मर्सडीज बेंज कंपनी में सेल्स और मार्केटिंग का काम देखते थे। हालांकि खेल से रिटायरमेंट के बाद उन्होंने बिजनेस किया।

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