फ़्रांस के राष्ट्रपति फ़्रांस्वा ओलांड के कार्यालय ने कहा है कि यूक्रेन में रूस की कार्रवाई के कारण ऐसा किया गया है.

हालाँकि फ़्रांस को दो नौसैनिक युद्धपोत रूस को देने थे. लेकिन फ़िलहाल पहले युद्धपोत के बारे में ही ये फ़ैसला किया गया है.

फ़्रांस पर ये युद्धपोत न देने का दबाव पहले से ही पड़ रहा था. लेकिन अभी तक फ़्रांस की सरकार दबाव में नहीं आई थी.

रूस ने फ़्रांस से 90 करोड़ डॉलर में दो नौसैनिक युद्धपोत ख़रीदने का करार किया था.

'नाटकीय बदलाव'

बीबीसी के पेरिस स्थित संवाददाता का कहना है कि युद्धपोत न देने का फ़ैसला फ़्रांसीसी सरकार के रुख़ में नाटकीय बदलाव का संकेत है.

क्योंकि फ़्रांस का पहले ये तर्क था कि करार रद्द करने से उसे भारी क़ीमत चुकानी पड़ेगी.

व्लादीवोस्टोक नाम का पहला युद्धपोत इस साल अक्तूबर में रूस को दिया जाना था. जबकि सेवास्टोपोल नाम का दूसरा नौसैनिक युद्धपोत अगले साल रूस को दिया जाना था.

ओलांड के कार्यालय की ओर से जारी बयान में दूसरे नौसैनिक युद्धपोत ज़िक्र नहीं किया गया है.

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