- स्कूलों के बाहर घूम रहे आवारा लड़के कर रहे स्टूडेंट्स को टारगेट

- इनके निशाने पर रहते बाइक वाले लड़के, बच्चों से ऐंठते हैं पैसे

GORAKHPUR: स्कूल ड्रेस में बेल्ट निकालकर सड़कों पर मारपीट का सीन आपने देखा होगा और उसे इग्नोर कर दिया होगा. इसी तरह धुएं का छल्ला बनाते स्मार्ट स्कूल ब्वॉयज को भी देखकर आप निकल गए होंगे. लेकिन अब ऐसा नहीं करिएगा. इस तरह की एक्टीविटी करने वालों में आपका बच्चा भी हो सकता है. क्योंकि शहर के स्कूलों के बाहर आवारा किस्म के लड़के जो अपने आप को उस एरिया का दादा समझते हैं, स्कूल के स्टूडेंट्स को टारगेट करने में लगे हैं. इनके निशाने पर वह स्टूडेंट्स होते हैं जिनके पास बाइक हो और वे संपन्न परिवार से हों. ऐसे स्टूटेंड्स को अपना चेला बना ये दादा उनसे पैसे तक ऐंठ रहे हैं. ये आवारा लड़के शहर के हर स्कूल के बाहर आपको दिख जाएंगे. इस प्रॉब्लम से शहर के सभी स्कूल परेशान हैं.

हर स्कूल के बाहर लगती दादा की क्लास

शहर के स्कूलों के बाहर गमछा लपेटे मुंह में गुटखा भरे कुछ आवारा किस्म के लड़के छुट्टी के समय घूमते हर दिन नजर आते हैं. इन्हें मामूली मत समझिए. ये इस इलाके का दादा अपने आप को बताते हैं. स्टूडेंट्स के सामने मारपीट कर कम ही दिन में उनका दिल जीत लेते हैं. इसके बाद टीचर्स को नहीं बल्कि दादा को ही स्टूडेंट्स अपना आइडियल मानने लगते हैं. एक स्टूडेंट के जरिए ही ये मनबढ़ लड़के पूरे स्कूल में घुस जाते हैं. इनके पास स्कूल के सारे बच्चों का डाटा पहुंच जाता है. स्टूडेंट्स के जरिए ये वसूली कराने तक से ये लड़के बाज नहीं आते.

कंटर के लिए होती मारपीट

स्कूल के स्टूडेंट्स का अपने चंगुल में फंसाने के लिए कई बार दो गुटों में मारपीट भी होती है. दोनों ही गुट इन स्टूडेंट्स को कंटर और मोटा मुर्गा के नाम से पुकारते हैं. कंटर को अपनी ओर करने के लिए ये आए दिन मारपीट करते रहते हैं.

स्टूडेंट्स का करते यूज

स्कूल जाने वाले स्टूडेंट्स को फंसाने के पीछे केवल पैसा कारण होता है. इन दादा लोगों को जो ज्यादा पैसा देता है उसे ये अपना खास चेला बनाते हैं. हद तो ये कि स्टूडेंट्स भी दादा का खास बनने के लिए कुछ भी करते हैं. स्टूडेंट जेब खर्चे के अलावा जरूरत पड़ने पर घर से पैसे चुराने भी लगते हैं. इनके साथ रहते-रहते स्टूडेंट्स नशे के आदी भी हो जाते हैं.

इन एरियाज में दादा राज

शहर में इस समय तारामंडल, गोरखनाथ, सुर्यकुंड, बरगदवां, सिविल लाइंस, बिछिया, असुरन, शाहपुर, कूड़ाघाट सहित जहां भी बड़े और नामी स्कूल हैं वहां ये दादा राज कायम है.

कोट्स

शहर के हर स्कूल इन लड़कों से परेशान हैं. पैरेंट्स को बच्चे के आने-जाने की टाइमिंग पर ध्यान देना होगा. उनकी फ्रेंड सर्किल कैसी है इस पर भी फोकस करना होगा. अगर बच्चा घर पर समय ना देकर बाहर की दुनिया में मस्त है तो इसे कतई ना इग्नोर करें नहीं तो आगे चलकर इसका गलत परिणाम भुगतना पड़ेगा.

अजय शाही, डायरेक्टर, आरपीएम स्कूल

मेरे पास कुछ कंप्लेंस इस तरह की आ चुकी हैं. सबसे जरूरी है कि पैरेंट्स स्कूल में होने वाली मीटिंग को जरूर ज्वॉइन करें. इसमें बाहर का माहौल और बच्चे की एक्टीविटी के बारे में पता चलता है. जो भी स्टूडेंट बाहरी लड़कों के दबाव में है, वह आकर मुझसे मिल सकता है. उसकी प्रॉब्लम दूर की जाएगी.

गिरीश चन्द्र मिश्रा, प्रिंसिपल, ऑक्सफोर्ड पब्लिक स्कूल, भगत चौराहा

गोरखनाथ एरिया में स्कूलों की संख्या बहुत अधिक है. यहां पर इस तरह के लड़कों का समूह हर स्कूल के बाहर काम कर रहा है. पैरेंट्स थोड़ा समय निकालकर अपने बच्चे पर ध्यान दें तो ये प्रॉब्लम कम होगी. हम लोग भी जान सकेंगे कि बाहर बच्चा क्या कर रहा है. स्कूल के आस-पास हम लोग खुद ध्यान देते हैं कि बच्चे बाहर जाकर अपना टाइम ना बर्बाद करें.

डॉ. सलील के श्रीवास्तव, एडमिन हेड, जेपी एजुकेशन एकेडमी

शहर में हर स्कूल के बाहर ऐसे अराजक तत्व घूमते नजर आते हैं. इनका बच्चों के फ्यूचर खराब करने में अहम रोल होता है. इस तरह की बात सामने आई थी तो हमने नोटिस भी दी थी. पैरेंट्स को समझाया भी जाता है कि बच्चा घर से कब निकला और स्कूल से कब घर पहुंचा इस पर फोकस करना होगा. जरूरत पड़े तो स्कूल में फोन करके इसका पता भी कर सकते हैं.

विवेक कुमार श्रीवास्तव, मैनेजर, रैंपस स्कूल