- एसएफआईओ और सीबीआई की जांच में खुल रही घोटाले की पर्ते

- पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के करीबी इकबाल ने बनाई थी कंपनियां

- कई अन्य घोटालों से भी जुड़ रहे तार, मास्टरमाइंड की जारी है तलाश

ashok.mishra@inext.co.in
LUCKNOW : जांच में सामने आया है कि ज्यादातर चीनी मिलें बोगस कंपनियां बनाकर खरीदी गयी थीं और इसमें बसपा सरकार के कद्दावर मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के करीबी माने जाने वाले सहारनपुर के एमएलसी मोहम्मद इकबाल की अहम भूमिका थी. पहले से कई एजेंसियों के निशाने पर रहे मोहम्मद इकबाल ने अपने दोनों बेटों और करीबियों के नाम से ये कंपनियां बनाई, जिसके बाद इनमें बड़े पैमाने पर काली कमाई को निवेश कर चीनी मिलों को खरीदा गया. सीरियल फ्राड इंवेस्टिगेशन आर्गेनाइजेशन की जांच में यह सामने आने के बाद जब सीबीआई ने पड़ताल की तो पता चला कि इन कंपनियों को बनाने में इकबाल केवल मोहरा है, इसका मास्टरमाइंड कोई और है जिसकी तलाश हो रही है.

वेव ग्रुप की ओर घूम रही शक की सुई
सूत्रों की मानें तो सीबीआई की जांच में शक की सुई सबसे ज्यादा चीनी मिलें खरीदने वाले वेव ग्रुप की ओर घूम रही हैं. बसपा सरकार में वेव ग्रुप के मालिक पोंटी चड्ढा की मजबूत पकड़ को इसकी वजह माना जा रहा है. सीबीआई को आशंका है कि वेव ग्रुप के इशारे पर ही इकबाल ने बोगस कंपनियां बनाकर चीनी मिलें खरीदी थीं. साथ ही इसमें कई राजनेताओं और ब्यूरोक्रेट्स की काली कमाई को खपाया गया था. यही वजह है कि सीबीआई ने इकबाल के चार्टर्ड अकाउंटेंट पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, ताकि इन कंपनियों में काली कमाई को ट्रांसफर करके व्हाइट मनी बनाने वालों को चिन्हित किया जा सके. इसके अलावा चीनी मिलों की बिक्री में अहम भूमिका निभाने वाले तत्कालीन प्रमुख सचिव सीएम नेतराम पर भी शिकंजा कसा जा रहा है ताकि इस मामले के असली मास्टरमाइंड का पता लगाया जा सके. जांच में यह भी सामने आया है कि इन मिलों को खरीदने में कुछ अन्य प्राइवेट मिलों के प्रबंध तंत्र ने भी रुचि दर्शाई थी पर ऐन वक्त पर उन्होंने अपने प्रस्ताव वापस ले लिए. सीबीआई इस पहलू को ध्यान में रखकर उनसे भी पूछताछ की तैयारी में है ताकि पता लगाया जा सके कि किसके इशारे पर उन्होंने अपनी दावेदारी वापस ली थी.

ये थी एसएफआईओ की रिपोर्ट
राज्य चीनी निगम लिमिटेड ने चीनी मिलें खरीदने वाली दो बोगस कंपनियों के खिलाफ 9 नवंबर 2017 को गोमतीनगर थाने में एफआइआर कराई थी. यह रिपोर्ट केंद्र सरकार की एजेंसी सीरियस फ्राड इंवेस्टिगेशन आर्गेनाइजेशन की जांच के बाद दर्ज हुई थी. ये दोनों कंपनियां नम्रता मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड और गिरियाशो कंपनी प्राइवेट लिमिटेड थीं, जिन्होंने देवरिया, बरेली, लक्ष्मीगंज (कुशीनगर) और हरदोई आदि मिलें खरीदी थीं.