-एमजीएम हॉस्पिटल के जूनियर डॉक्टर्स की स्ट्राइक

-मरीजों की बढ़ गई है परेशानी

JAMSHEDPUR: महात्मा गांधी मेमोरियल (एमजीएम) हॉस्पिटल के जूनियर डॉक्टर्स की स्ट्राइक शुक्रवार को भी जारी रही। इसके पेशेंट्स की परेशानी बढ़ गई है। चार महीने से स्टाइपेंड नहीं मिलने से एमजीएम हॉस्पिटल के जूनियर डॉक्टर्स गुरुवार से पेन डाउन स्ट्राइक पर हैं। शुक्रवार को जूनियर डॉक्टर्स ने हॉस्पिटल कैंपस में काला फीता लगा कर काफी हंगामा किया। हॉस्पिटल मैनेजमेंट के खिलाफ नारे लगाए। हॉस्पिटल सुपरिंटेंडेंट के लाख प्रयास के बाजूद डॉक्टरों ने मांगें नहीं माने जाने तक काम पर नहीं लौटने का फैसला किया।

भटकते रहे मरीज

शहर में एक मात्र सरकारी हॉस्पिटल होने के कारण यहां रोज मरीजों का तांता लगा रहता है। स्ट्राइक की वजह से इलाज के लिए एमजीएम आए मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हॉस्पिटल सुपरिंटेंडेंट ने ओपीडी और इमरजेंसी के बाहर भीड़ जुटते देख इंटर्नशिप कर रहे मेडिकल स्टूडेंट्स को ओपीडी और इमरजेंसी की कमान थमा दी।

मांगें नहीं मानने तक स्ट्राइक

जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन (जेडीए) के अध्यक्ष डॉ। चंद्रशेखर महतो ने कहा की पिछली बार चीफ मिनिस्टर रघुवर दास के जमशेदपुर आने पर जूनियर डॉक्टर की एक टीम उनसे मिलने गई थी। जेडीए ने अपनी परेशानी सीएम से भी बतायी थी। इसके बाद सीएम ने जल्दी ही कार्रवाई का आश्वासन दिया था। लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो जेडीए ओपीडी ओर इमरजेंसी सेवा भी बाधित करेगा।

भेजा गया है रिमाइंडर

हॉस्पिटल के सुपरिंटेंडेंट ने जेडीए से कहा कि एक्सट्रा बजट जब तक पास नहीं होगा, तब-तक किसी हाल में स्टाइपेंड नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा कि हॉस्पिटल का सालाना बजट चार करोड़ है, जबकि हेल्थ डिपार्टमेंट से फ्भ् लाख ही मिले हैं। इसका भुगतान जूनियर डॉक्टर्स को स्टाइपेंड के रूप में किया गया है। उन्होंने कहा कि हेल्थ सेक्रेटरी के पास रिमांनडर भेजा गया है। वे फिर रिमाइंड भेजेंगे। जब-तक वहां से जवाब नहीं आता वे कुछ नहीं कर सकते।

कार पर चिपकाये पोस्टर

नाराज जूनियर डॉक्टर्स ने हॉस्पिटल सुपरिंटेंडेंट आरवाई चौधरी की कार पर पोस्टर चिपकाया। जूनियर डॉक्टर के अध्यक्ष डॉ। चंद्रशेखर ने बताया कि एमजीएम एडमिनिस्ट्रेशन के पास टाइल्स लगवाने और हॉस्पिटल का मरम्मत करवाने के पैसे हैं, लेकिन जूनियर डॉक्टरों को स्टाइपेंड देने के लिए पैसे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पिछले सात महीने में उन्हें सिर्फ दो बार ही पेमेंट मिला है।