RANCHI : सरायकेला जिले में कई ऐसे गांव हैं, जहां बिजली तो नहीं है, लेकिन लोगों को बिजली बिल जरूर आता है। इन गांवों में सालों पहले राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत 10 केवीए के ट्रांसफार्मर लगाए गए थे। लेकिन, ओवरलोड व अन्य तकनीकी कारणों से ज्यादातर ट्रांसफार्मर खराब हो गए। इसके बाद से यहां के ग्रामीण बिजली आने का इंतजार कर रहे हैं, पर बिजली की बजाय इन्हें बिजली बिल मिल रहा है।

फेल हो गए सारे ट्रांसफार्मर

ओवरलोड, गुणवत्ता की कमी व अन्य तकनीकी कारणों की वजह से राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के अंतर्गत यहां लगाए गए 10 केवीए के ज्यादातर ट्रांसफार्मर बेकार साबित हो गए। लगाने के साथ ही ये ट्रांसफार्मर जल गए। ऐसे में बिजली विभाग ने इन गांवों में 25 केवीए के ट्रांसफार्मर लगाने की कवायद तो शुरु की, पर फेज बढ़ाने का रोड़ा पैदा हो गया। राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना में जहां केवल एक फेज व एक पोल की जरूरत पड़ती है, वहीं 25 केवीए के ट्रांसफार्मर के लिए तीन फेज लाइन का होना जरूरी है। ऐसे में पिंड्राबेड़ा गांव समेत कई गांवों में 25 केबी के ट्रांसफर्मर लगाने का काम अधर में लटक गया। बिजली विभाग के कार्यपालक पदाधिकारी एस के सिंह भी इत्तेफाक रखते है। उनका कहना है कि हाल में शुरु हुई पंडित दीनदयाल विद्युतकरण योजना के तहत पिंड्राबेड़ा गांव में बिजली लाने काम प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।

अंधेरे में रहने को मजबूर

सरायकेला जिले के रपचा पंचायत के पिंड्राबेड़ा गांव में 22 परिवार रहते हैं। मुखिया सुकमती मार्डी के मुताबिक, वर्ष 2009 में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत यहां 10 केवीए का ट्रांसफार्मर लगाया गया था, पर लोगों को एक दिन भी बिजली नसीब नहीं हुई, क्योंकि लगने के साथ ही ट्रांसफार्मर जल गया। ग्रामीणों ने कई वषरें तक रोशनी के लिए बिजली विभाग के चक्कर काटे, मगर कुछ खास फायदा नहीं हुआ। स्थानीय गोरखा हेम्ब्रम कहते हैं कि काफी प्रयास करने के बाद 2013 में यहां 25 केवीए का ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराया गया, लेकिन इसे इंस्टॉल करने के लिए इक्विपमेंट्स नहीं दिए गए। ऐसे में पिछले तीन वषरें से यह ट्रांसफार्मर यूं ही पड़ा है। वैसे, गांववालों को बिजली बिल जरूर भेजा जा रहा है।