क्त्रन्हृष्ट॥ढ्ढ: स्टेट के सबसे बड़े हॉस्पिटल रिम्स में किचन का टेंडर प्रॉसेस सवालों के घेरे में आ गया है. एक ओर जहां पांच महीने बाद भी टेंडर फाइनल नहीं हो पा रहा है. वहीं, इस बीच काम कर रही प्राइम किचन सर्विस के प्रतिनिधि ने भी टेंडर में गड़बड़ी का आरोप लगाया है. कहा कि प्रबंधन ने टेंडर के लिए वैसी एजेंसी को सेलेक्ट कर लिया है, जिस पर पहले से ही फ्रॉड का केस चल रहा है. इतना ही नहीं, सेलेक्ट की गई चार कंपनियों में तीन कंपनियां एक ही परिवार के मेंबर्स के नाम से हैं, जिसका जिक्र भी केस में किया गया है. इन सबके बावजूद पेपर्स की जांच नहीं की गई. ऐसे में अगर किसी एजेंसी को काम दिया जाता है तो यह गलत होगा. बताते चलें कि सेलेक्ट की गई कंपनियों में क्वालिटी कैटरर, सोनार बांगला और रॉय कंपनी हैं, जबकि एक अन्य कंपनी जेना कैटरर है.

जान बूझकर तो देरी नहीं

मरीजों को खाना खिलाने की जिम्मेवारी एजेंसी को दी गई है, जहां 1500 से अधिक मरीजों के लिए सुबह से लेकर रात तक तीन टाइम का डाइट तैयार किया जाता है. वहीं खाने का बिल हर महीने लगभग 45-50 लाख रुपए के बीच होता है. ऐसे में यह भी आशंका जताई जा रही है कि किसी खास एजेंसी को काम दिलाने के लिए भी टेंडर में देरी की जा रही है. चूंकि पांच महीने बीत जाने के बाद भी टेंडर फाइनल नहीं किया जा सका है.

वर्जन

अब तक किसी एजेंसी को फाइनल नहीं किया गया है, जहां तक गड़बड़ी की बात है तो जांच के बाद ही टेंडर की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

डॉ. डीके सिंह, डायरेक्टर, रिम्स

Posted By: Inextlive