-95 वर्ष पुराना हैंगिंग ब्रिज सर्वे में पाया गया अनसेफ

-सरकार ने पुल पर आवागमन रोकने के दिए निर्देश

-एक तरफ झुकने लगा था पुल, पाटर्स भी कोलेप्स

देहरादून

ऋषिकेश के विश्व प्रसिद्ध लक्ष्मण झूला पर सरकार ने लोगों की आवाजाही बंद कर करने के आदेश जारी किए हैं. 95 वर्ष पुराना यह पुल डिजायन टैक स्ट्रक्चरल कंसल्टेंट के सर्वे में एक तरफ झुकने के कारण आवागमन के लिए सुरक्षित नहीं बताया जा रहा. इसे तत्काल प्रभाव से लोगों की आवाजाही के लिए बंद करने की सिफारिश की गई थी. सरकार ने रिपोर्ट मिलने के 24 घंटे में ही आवाजाही बंद करने के आदेश जारी कर दिए. सरकार के आदेश पर टिहरी डीएम ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के साथ बैठक कर रात 12 बजे से पुल पर बैरियर लगाकर किसी भी तरह की आवाजाही रोकने के इंतजाम और यहां से गुजरने वालों को वैकल्पिक मार्गो से आवाजाही के लिए मोटिवेट करने के निर्देश दिए.

1923 में बना था लक्ष्मण झूला:

ऋषिकेश में गंगा के पार जाने के लिए वर्ष 1923 में अंग्रेजों ने हैंगिंग ब्रिज बनाया था. इस पर आज भी अंग्रेजों जमाने के ही नाम पट्टिकाएं लगी हैं. 95 वर्ष से यह पुल ऋषिकेश में देहरादून, टिहरी और पौड़ी जिले के लोगों को एक दूसरे से जोड़ रहा था. तीर्थनगरी में लोगों की आवाजाही बढ़ी तो करीब 35 वर्ष पहले इसके विकल्प के तौर पर समानांतर रामझूला भी बनाया गया. तब से दो पुल ही गंगा के दोनों पाट पर आने जाने की सुविधा बने हुए थे.

तकनीकि सर्वे के बाद यह सिफारिश:

सर्वे में देखा गया कि ब्रिज के अधिकतर पा‌र्ट्स/कंपोनेंटस फेल और कोलेप्स होने की कंडीशन में हैं. इस पुल पर अब पैदल चलने वालों को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए. मौजूदा स्थिति में इस पुल को आगे बनाए रखना संभव नहीं होगा. ऐसे में तत्काल प्रभाव से इसे बंद कर दिया जाए. अन्यथा कोई बड़ी मिस हैपनिंग हो सकती है. तकनीकि सर्वे में 95 वर्ष पूराने इस हैंगिग ब्रिज को पब्लिक की आवाजाही के लिहाज से अब असुरक्षित मानते हुए रिपोर्ट भेजी तो सरकार ने इसे बंद करने के आदेश जारी कर कर दिए.

सावन में बढ़ जाएगी परेशानी:

सावन में ऋषिकेश में गंगाजल भरने कावडि़यों का रेला उमड़ता है. सबसे अधिक कावडि़ए लक्ष्मण झूला से ही गंगा पार कर घाट पर पहुंचते थे. वहां से गंगाजल भरकर नीलकंठ शिव मंदिर में जाते हैं. ऋषिकेश में भी गंगा पार हजारों की आबादी को यह पुल दूसरे हिस्से से जोड़ता है. इस पुल पर वर्तमान में पैदल और टू व्हीलर से लोगों को आवाजाही की सुविधा थी.

तीन जिलों को जोड़ता था एक पुल:

ऋषिकेश उत्तराखंड का ऐसा कस्बा है,जिसमें तीन जिलों की सीमा लगती है. लक्ष्मण झूला इन तीन जिलों को जोड़ने वाला अहम पुल था. रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड समेत मुख्य मार्केट, स्कूल,कॉलेज देहरादून जिले में है. चंद्रभागा पुल के पार टिहरी जिले की सीमा है. चार धाम यात्रा जाने वाला मार्ग भी टिहरी जिले में है. हर वर्ष चार धाम यात्रा के लिए लाखों यात्री इसी मार्ग से ऋषिकेश पहुंचते हैं और लक्ष्मण झूला व रामझूला होकर पैदल गंगा पार की दूसरी तरफ पौड़ी जिले की सीमा में बने घाटों पर स्नान कर मंदिरों में दर्शन करते हैं. विश्वप्रसिद्ध परमार्थ निकेतन सहित दर्जनों मंदिर भी गंगा के दूरी तरफ हैं. ऐसे में अब पैदल गंगा पार करने वालों के लिए एक ही विकल्प रह जाएगा.

वाहनों के लिए दो पक्के पुल

हालांकि ऋषिकेश में ही फोर व्हीलर से गंगा पार करने के लिए दो अन्य पुल भी हैं. एक हरिद्वार रोड पर बने बैराज का पुल और दूसरी पौड़ी जाने वाले वाहनों के लिए गरुड़चट्टी पर पुल भी बने हैं. लेकिन इन दौनों से पैदल गंगा पार कर दूसरी तरफ पहुंचने के लिए करीब 16 किमी का सफर तय करना पड़ता है.

अब रामझूला पर बढ़ जाएगा दबाव:

लक्ष्मण झूला से आवाजाही बंद होने पर अब वहां से 3 किमी आगे बने रामझूला पुल पर लोगों की आवाजाही का दबाव बढ़ जाएगा. गंगा पार पौड़ी जिले की सीमा में रहने वाले हजारों परिवारों के बच्चे लक्ष्मणझूल पार कर स्कूल जाते हैं. देहरादून आना हो या टिहरी जाना हो. लक्ष्मण झूला ऋषिकेश की लाइफलाइन बन गया था. स्थानीय लोगों के अलावा बाहरी लोग भी इसी से गंगा पार करते थे. अब रामझूला पर यात्रियों का दबाव बढ़ जाएगा.

लक्ष्मण झूल से आवागमन बंद, अब आगे क्या होगा:

लक्ष्मण झूला पर लोगों की आवाजाही बंद करने के बाद आगे क्या होगा, इस सवाल के जवाब पर पीडब्ल्यूडी के नरेन्द्र नगर एक्जीक्यूटिव इंजीनियर मोहम्मद आरिफ खान कहते हैं कि आगे सरकार तय करेगी क्या होगा. लक्ष्मण झूला को ही रिपेयर कर इसके पा‌र्ट्स बदले जाएंगे,या फिर इसके स्थान पर दूसरा पुल बनाया जाएगा. फिलहाल हमें इस पर लोगों की आवाजाही रोकने के निर्देश दिए गए हैं, तो वह करेंगे.