राजा भतृर्हरि नौटंकी ने बांधा समां

2020-01-24T05:45:06Z

-संस्कार भारती की तरफ से माघ मेला में हो रहा अवलोकन तीरथराजु चलो रे

PRAYAGRAJ: एक तरफ भांगड़ा का जलवा था तो दूसरी ओर नौटंकी के नवरस। दिल लुभाती एग्जिबिशन थी तो प्रेमी-प्रेमिका की छेड़छाड़ से सराबोर जिन्धुआ नृत्य की प्रस्तुति। यह नजारा था संस्कार भारती की तरफ से माघ मेला में आयोजित अवलोकन तीरथराजु चलो रे कार्यक्रम का। यहां पर गुरुवार को जन-जन के राम एग्जिबिशन का उद्घाटन भी किया गया।

जिनधुआ से खुशनुमा

इसके पहले कार्यक्रम का आगाज पटियाला से आए तरनजीत सिंह और उनके 16 साथियों की टीम के जिनधुआ नृत्य से हुआ। प्रेमी-प्रेमिकाओं के बीच होने वाली छेड़छाड़ और हंसी-ठिठोली को दर्शाता जिनधुआ नृत्य से पूरा माहौल खुशनुमा हो गया। अपने अन्य लोकनृत्यों से तरनजीत सिंह की टीम ने मंच पर पूरा पंजाब जीवंत कर दिया। वीरोचित नृत्यों ने पूरा माहौल वीररस से भर दिया।

जी उठे नौटंकी के पात्र

अगली प्रस्तुति में कौशांबी से आए संतोष कुमार की टीम ने राजा भतृर्हरि नौटंकी प्रस्तुत की। राजसी ठाट-बाट और उससे विरक्ति की राजा भतृर्हरि की कहानी को बहुत प्रभावी ढंग से कलाकारों ने प्रस्तुत किया। नगाड़े, हारमोनियम और ढोलक के साथ नौटंकी की उत्कृष्ट गायकी ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। कार्यक्रम की शुरुआत में संस्कार भारती के संस्थापक संरक्षक कलाऋषि बाबा योगेन्द्र ने राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश के सहयोग से माघ मेला के अवसर पर देश के चुने हुए कलाकारों द्वारा बनाई गई जन जन के राम विषयक पेंटिंग्स और मूर्तियों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। आए हुए गेस्ट्स का वेलकम संस्कार भारती की अध्यक्ष कल्पना सहाय ने किया। कार्यक्रम के आयोजन में एनसीजेडसीसी, पटियाला, केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी, दिल्ली और राज्य ललित कला अकादमी, उत्तर प्रदेश का विशेष सहयोग है।

आज की पेशकश

शनिवार 24 जनवरी को रागनी चन्द्रा का कजरी गायन, रामबाबू का बिरहा गायन, फूलचंद और कौशल्या का लोकगीत गायन होगा।


Posted By: Inextlive

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