यूपी एटीएस ने अवैध इंटरनेट कॉलिंग का रैकेट चलाने वाले गिरोह के छह सदस्यों को कुशीनगर जिले से गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरोह का सरगना राम प्रताप सिंह दुबई से लौटने के बाद यह गोरखधंधा अंजाम दे रहा था। वह आरएन ग्रुप प्राइवेट लिमिटेड संस्था के नाम से वीओआईपी डायलर का काम कर रहा था। इससे विदेश से इंटरनेट कॉल कर सिम बाक्स के माध्यम से वाइस कॉल में बदल कर भारत के किसी भी नंबर पर बात कराई जा सकती है और विदेशी नंबर की जगह डिस्प्ले पर भारत का ही नंबर दिखता है। ऐसी कॉल गेटवे के माध्यम से नही आती है जिसके कारण सुरक्षा एजेंसियों एवं ट्राई के द्वारा इनकी मॉनीटरिंग करना असंभव होता है।


- यूपी एटीएस ने कुशीनगर जिले से किया गिरफ्तार- वीओएस 3000 साफ्टवेयर के जरिए चल रहाकई गिरफ्तारियों के बाद भी जारी थी कॉलिंगआईजी एटीएस असीम अरुण ने बताया कि एटीएस द्वारा पिछले वर्ष इंटरनेट गेटवे को बाईपास कर तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को धता बताते हुए कार्य करने वाले 27 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर 16 सिम बॉक्स और लगभग 50 हजार सिम बरामद किये गए थे। इसके बावजूद इन सिम बॉक्स में ट्रैफिक कहां से आ रहा था और नेट कॉलिंग कार्ड कहां से आम व्यक्ति ले रहे थे, इसकी जानकारी नहीं हो पा रही थी। इस मामले की गहनता से जांच करने पर पता चला कि कुशीनगर में सक्रिय यह गिरोह इस गोरखधंधे को अंजाम दे रहा है। इंटरनेट कॉल को वाइस कॉल में बदल देते
यह लोग कॉलिंग कार्ड बेचते हैं जिनके माध्यम से कॉल करने पर इंटरनेट कॉल को वाइस कॉल में बदल देते हैं। राम प्रताप सिंह को प्रदेश के बाहर के एक व्यक्ति के द्वारा वीओएस 3000 सॉफ्टवेयर के बारे में बताया गया था। रामप्रताप का मुख्य सर्वर विदेश में है। इसमें सभी काम ब्राउजर के माध्यम से इंटरनेट पर किया जाता है। वहीं वीओएस 3000 का मुख्य कार्य वीओआईपी कॉल को पीएसटीएन पर डायवर्ट करने का है। इनके द्वारा सिम बॉक्स पर की जाने वाली कॉल्स (ट्रैफिक) को नियंत्रित किया जाता है अर्थात किस सिम बॉक्स को कितनी कॉल देनी है।

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Posted By: Shweta Mishra