अयोध्या विस्फोट कांड में चार को आजीवन कारावास

2019-06-19T10:31:04Z

पांच जुलाई 2005 को राम जन्मभूमि परिसर में हुए आतंकी हमले में कोर्ट ने चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है

-दोष साबित न होने पर एक को कोर्ट ने किया बरी

-प्रत्येक दोषी पर 60 हजार रुपए का लगाया गया जुर्माना

-2005 में राम जन्मभूमि परिसर में लश्कर आतंकियों ने किया था हमला
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PRAYAGRAJ: करीब 14 साल तक तारीख पर तारीख के बाद आखिरकार अयोध्या विस्फोट कांड में मंगलवार को फैसला आ गया. पांच जुलाई 2005 को राम जन्मभूमि परिसर में हुए आतंकी हमले में कोर्ट ने चार दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है. यह फैसला प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल स्थित स्पेशल कोर्ट में हुई सुनवाई के बाद सुनाया गया. फैसले में एक आरोपी को बरी कर दिया गया है. इन सभी पर हमले की साजिश रचने का आरोप था. सभी आरोपी पिछले कई वर्षो से नैनी जेल में ही बंद थे. मामले की सुनवाई स्पेशल जज दिनेश चंद्र कर रहे थे.

चार को सजा एक दोषमुक्त

- आसिफ इकबाल - उम्र कैद 60 हजार

- मो. नसीम - उम्र कैद 60 हजार

- मो. शकील अहमद - उम्र कैद 60 हजार

- डॉ. इरफान - उम्र कैद 60 हजार

- मो. अजीज - दोष मुक्त बरी

नेपाल के रास्ते से हुए थे दाखिल
पांच जुलाई 2005 की सुबह करीब नौ बजकर 15 मिनट पर घातक शस्त्रों से लैस आतंकियों ने राम जन्मभूमि को निशाना बनाया था. विस्फोटक से भरी टाटा सूमो को परिसर की दीवार से टकरा दिया था, जिसके बाद भीषण विस्फोट हुआ था. सूमो में सवार आतंकी चलती गाड़ी से कूद गए थे. इस विस्फोट में वहां मौजूद गाइड रमेश पांडेय के चीथड़े उड़ गए थे. ब्लास्ट में सात लोग घायल हुए थे, जबकि सात लोगों की मौत हो गई थी. लश्कर-ए-तैयबा के कुख्यात आतंकियों ने राम जन्म भूमि परिसर को निशाना बनाया था. हमले में शामिल सभी आतंकी नेपाल के रास्ते से भारत में दाखिल हुए थे. हालांकि सुरक्षा में जुटे जवानों ने एक घंटे के अंदर पांच आतंकियों को मौत के घाट उतारते हुए हालात पर काबू पा लिया था.

बरामद हुई थी हैंड ग्रेनेड
घटना की एफआईआर थाना राम जन्मभूमि में तैनात दलनायक कृष्णचंद्र सिंह ने तत्काल दर्ज कराई थी. जांच के दौरान पुलिस ने मौके से पांच एके 47 राइफल, हैंड ग्रेनेड, चाइनीज पिस्टल, नब्बे कारतूस के खोखे बरामद किए थे. मामले की विवेचना निरीक्षक दुलारे लाल अरुण को सौंपी गई थी.

पांच आतंकियों के नाम आए थे सामने
विवेचना के दौरान पांच आतंकवादियों के नाम का खुलासा हुआ था. इसमें आशिक इकबाल उर्फ फारुक, मो. नसीम, मो. अजीम, शकील अहमद जम्मू के और डॉ. इरफान उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के निवासी पाए गए. विवेचक ने 24 मार्च 2006 को आरोप पत्र पेश किया था.

इन्होंने की विवेचना
निरीक्षक दुलारे लाल अरुण, जेपी सिंह, कैलाश नाथ द्विवेदी, जगदीश प्रसाद सिंह, राम ललित दुबे, अविनाश मिश्र, अजीत कुमार सिन्हा ने विवेचना कार्रवाई को अंजाम दिया.

सुनवाई इन जजों ने की
मामले की सुनवाई अपर जिला जज सीताराम निगम, विकास अहमद अंसारी, वीएम गुप्ता, अतुल कुमार गुप्ता, प्रेम नाथ, सुरेंद्र सिंह ने की. मामले के अंतिम जज दिनेश चंद्र रहे, जिन्होंने फैसला सुनाया.


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