रोडवेज की बसें बेहाल नहीं होती देखभाल

2019-07-10T06:00:50Z

- रोडवेज की अधिकतर बसों में चलता जुगाड़ सिस्टम

- एसी बसों में गंदे पर्दे और दागदार सीट पैसेंजर्स को करती परेशान

GORAKHPUR: सरकारी संपत्ति भी आप की अपनी संपत्ति है, ऐसा स्लोगन ट्रेन और बस स्टेशनों पर लिखा रहता है। जिससे पैसेंजर्स अवेयर हों और गाड़ी की केयर करें। लेकिन पैसेंजर्स तो दूर की बात यहां तो सरकारी इम्प्लॉइज ही सुधरने को तैयार नहीं हैं। रोडवेज के ड्राइवर्स का ही हाल देख लिजिए। जिस बस को सरकारी ड्राइवर चला दे फिर क्या मजाल है कि उसे कोई और चला पाए। ड्राइवरों की लापरवाही की वजह से बस का हर फंक्शन जुगाड़ू हो जाता है। इसी तरह धीरे-धीरे बस कम ही दिन में कबाड़ हो जाती है। इसमें ऊपर बैठे जिम्मेदारों का भी मेन रोल होता है। वे कभी अपने ही डिपो की बसों की जांच नहीं करते जिससे ड्राइवर भी अपनी मनमानी करते रहते हैं।

नाम की एसी बस

ऑर्डिनरी बसों के मुकाबले एसी बसों का किराया कहीं अधिक तो लिया जाता है लेकिन उसके मुकाबले पैसेंजर्स की सुविधा का जरा भी ध्यान नहीं रखा जा रहा। एसी बस में इंट्री करते ही गंदे पर्दे और दागदार सीट के दर्शन होते हैं। जिसे देख एसी पैसेंजर्स नाक-भौंह सिकोड़ते हैं। लेकिन दूसरा कोई ऑप्शन न होने के कारण मजबूरी में वे गंदी बस में ही सफर करते हैं। गोरखपुर से चलने वाली जनरथ बसों के अंदर जरा भी सफाई नहीं दिखती है।

बस हो जाती धक्का प्लेट

आए दिन रोडवेज बसें रास्ते में ही खराब भी हो जाती हैं। जिसके बाद पैसेंजर्स को ही धक्का देकर गाड़ी स्टार्ट करानी पड़ती है। बीते दिनों तो रेलवे स्टेशन स्थित बस स्टेशन पर देर रात काफी देर तक एक एसी बस को पैसेंजर्स धकेलते रहे लेकिन वो स्टार्ट नहीं हुई।

गोरखपुर डिपो में बसों की संख्या

निगम की बस - 98

अनुबंधित बस -93

डेली आते पैसेंजर्स -10000

राप्ती नगर डिपो में बसों की संख्या

निगम की बसें - 99

अनुबंधित बसें - 48

जनरथ बस - 42

डेली आते पैसेंजर्स - 6000

एसी बस का किराया

जनरथ बस का दिल्ली का किराया - 1452 रुपए

जनरथ बस का लखनऊ का किराया - 510 रुपए

स्कैनिया बस का दिल्ली का किराया - 2100 रुपए

स्कैनिया बस का लखनऊ का किराया - 800

कोट्स

एसी बस में सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं मिलता है। केवल एसी लगा दी और बढ़ा दिया किराया। पैसेंजर्स की क्या जरूरत है इससे कोई मतलब नहीं है।

अभय सिंह

यातायात के नियम का पालन तो नाम मात्र का रह गया है। गवर्नमेंट इंप्लाई नियमों को तोड़ने में सबसे आगे रहते हैं।

दीपक जायसवाल

बस के ड्राइवर के साथ ही परिवहन विभाग भी लापरवाही का जिम्मेदार होता है। ट्रैफिक नियमों के पालन के साथ लंबी दूरी की गाडि़यों में दो ड्राइवर मस्ट हैं।

अंशुमान पाठक

आम लोगों की तरह ही बस के ड्राइवर को भी नियमों का पालन करना चाहिए। उसके ऊपर तो कईयों की जिम्मेदारी रहती है। इसमे लापरवाही भारी पड़ती है।

एनन मारूफी

एसी बसों का किराया वसूलकर डीसी सुविधा देने वालों पर कार्रवाई होगी तभी ये सुधरेंगे। बसों में सफाई का भी ध्यान देना चाहिए।

अरविंद पांडेय

वर्जन

बसों की नियमित जांच की जाती है। जो भी खराब गाडि़यां दिखती हैं वो दूसरे डिपो की हैं।

केके तिवारी, एआरएम


This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.