रेलवे ठेकों के लिए गैंगवार का बन रहा आधार

2019-02-14T06:00:28Z

आई स्पेशल

-एक बार फिर पूर्वाचल में गैंगवार की बढ़ी आंशका,

-ठेका के लिए एक कुख्यात बदमाश की मौजूदगी में डीआरएम बिल्डिंग पर लहराए गए असलहे, हुई जमकर मारपीट

कुबेर के खजाने जैसा रेलवे ठेका

हथियाने के लिए अपराधी गुटों में भिड़ंत की बात पुरानी है। हालांकि पिछले कुल सालों से पूर्वाचल में आपसी सहमति से सब शांति से चल रहा था। लेकिन यह बहुत दिनों तक कायम नहीं रह पायी। मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन के गेट नंबर दो पर खुलने वाले वाहन स्टैण्ड का ठेका हासिल करने के लिए बुधवार को दो गुट आमने-सामने हो गए। पूर्वोत्तर रेलवे के डीआरएम बिल्डिंग पर खूब असलहा चमकाया गया। एक गुट के गुर्गो ने छात्रनेताओं की शह पर पत्थरबाजी और मारपीट की। जानकारों की मानें तो यह महज शुरुआत है। आने वाले दिनों में ठेके के लिए गैंगवार होने का प्लेटफार्म तैयार हो चुका है। कभी भी कोई इसकी बलि चढ़ सकता है।

बदल गया समीकरण

कुछ महीनों पूर्व बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद उसके गुर्गे साइलेंट हो गए। वहीं उसके विरोधी यूपी की राजधानी लखनऊ से फास्ट हो गए है। बनारस, गोरखपुर, देवरिया में रेलवे ठेका हथियाने के लिए पूरी रणनीति बनाकर काम कर रहे हैं। सत्ता में काबिज पार्टी के एक माननीय का भी रेलवे ठेकों में दखल रहा है। उसने भी अपना पकड़ को मजबूत कर दिया है।

एक-दूसरे को दे रहे चुनौती

एक पखवारा पूर्व प्रयागराज के एक ठेकेदार को 48 लाख में शेड का काम मिलने वाला था। लखनऊ में बैठे दबंग कांट्रेक्टर की शह पर बनारस के कुख्यात ने शेड का टेंडर प्रयागराज के ठेकेदार को नहीं डालने दिया। गुर्गो के साथ पहुंचे कुख्यात ने ठेकेदार की मंडुवाडीह सेकेंड इंट्री गेट पर पिटाई भी की थी। उक्त ठेकेदार को बनारस में काम नहीं करने की धमकी दी गई है। हालांकि ठेकेदार ने भी दूसरे गुट से हाथ मिला लिया है। अब दोनों एक-दूसरे को चुनौती दे रहे हैं।

हो चुकी हैं हत्याएं

रेलवे ठेका पाने के लिए माफिया कुछ भी कर गुजरते हैं। कमीशन पर सेट अधिकारी भी जिसका पलड़ा भारी देखते है उसी के साथ गलबहियां कर लेते हैं। अगर किसी ने रोड़ा अटकाया तो उसकी जान लेने से भी नहीं हिचकते हैं। कुछ साल पहले ठेकों में रूकावट बन रहे डीएलडब्ल्यू कर्मी टीके मुकेश की घर के बाहर बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस मामले में डीएलडब्लयू का फोर्थ क्लास कर्मी बबलू राय और उसका भाई डब्ल्यू राय उन्नाव जेल में बंद है। इसके अलावा पूर्वाचल के कई माफिया, बाहुबली, विधायक, एमएलसी के गुर्गे डीएलडब्ल्यू में करोड़ों के ठेकों पर नजर गड़ाए रहते हैं।

छात्र नेताओं को बनाया मोहरा

माननीय हो या फिर दबंग किस्म के कांट्रेक्टर हमेशा से छात्रनेताओं को मोहरा बनाते आए है। चुनाव में पैसा खर्च करके उन्हें अपने पाले में खींचते हैं और फिर रेलवे ठेका, जमीन-मकान कब्जा जैसे कामों में उनका इस्तेमाल करते हैं। पूर्वोत्तर रेलवे के डीआरएम ऑफिस पर पार्किंग ठेका को लेकर सुबह हुई मारपीट की घटनाओं में काशी विद्यापीठ व यूपी कॉलेज के छात्रसंघ पदाधिकारियों सहित पूर्व पदाधिकारियों की भूमिका भी रही। रेलवे ठेका पाने वाले अधिकतर माननीय के गुर्गे छात्रनेता ही बनते है। क्योंकि उनके पीछे छात्रों की लंबी फौज होती है।

भिड़ गए दो गुट

मंडुवाडीह के सेकेंड इंट्री गेट प्वाइंट पर पार्किंग टेंडर को लेकर बुधवार की सुबह लहरतारा में दो गुट आपस में भिड़ गए। मारपीट, पत्थरबाजी के बाद असलहे भी चमकाए गए। आरोप है कि हवाई फायरिंग भी की गई। लखनऊ में बैठे प्रदीप कुमार सिंह और चंदौली के एक विधायक के कुछ गुर्गे साइकिल टेंडर डालने पहुंचे थे। इसी बीच कुछ लोगों ने असलहा निकाल लिया और मारपीट करने लगे। यह देख कालोनी के कुछ युवकों ने कार सवार युवकों को दौड़ा लिया और पत्थरबाजी करने लगे। सूचना पाकर पहुंची सिगरा पुलिस तीन युवकों को हिरासत में लेकर थाने पहुंची। सीओ चेतगंज अंकिता सिंह ने बताया कि टेंडर डालने को लेकर दो गुट आपस में टकरा गए, हवाई फायरिंग नहीं हुई है।

Posted By: Inextlive

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