इंग्लैंड की फ़ुटबॉल टीम में एशियाई मूल के खिलाड़ियों की कमी पर तो काफी शोर होता रहा है लेकिन क्रिकेट का क्या हाल है?


इंग्लैंड के लिए सालों से कई एशियाई खिलाड़ी क्रिकेट खेलते रहे हैं, ऐसे में कोई समस्या नज़र तो नहीं आती.लेकिन इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ईसीबी) का मानना है कि इंग्लैंड के अंदरूनी इलाक़ों में बसे एशियाई समुदाय के लोगों तक पहुंचने और नई प्रतिभाओं को सामने लाने के लिए काफी कुछ किया जा सकता है.ईसीबी ने गुरुवार को ऐतिहासिक  लॉर्ड्स मैदान पर ब्रितानी एशियाई मीडिया के सामने अपनी भावी योजनाओं का खाका पेश किया.क्लब और संस्कृतिइंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइक गेटिंग ने बताया कि बोर्ड क्या चाहता है. गेटिंग फिलहाल ईसीबी के क्रिकेट साझेदारी मामलों के प्रबंध निदेशक हैं.


गेटिंग ने कहा, "हम ब्रिटेन में लंबे समय से रह रहे एशियाई मूल के लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं. हम इस संभावना की भी तलाश कर रहे हैं कि उनकी प्रतिभा का इस्तेमाल ब्रिटेन के क्रिकेट को और समृद्ध बनाने में कैसे किया जा सकता है. हमने क्रिकेट के प्रति एशियाई मूल के युवाओं का जुनून देखा है."वसीम खान ऐसे पहले ब्रितानी पाकिस्तानी हैं जिन्होंने इंग्लैंड में प्रथम श्रेणी का क्रिकेट खेला. उन्होंने साल 1995 में वार्विकशायर में अपनी पहली पारी खेली थी. आजकल वे 'चांस टू शाइन' नाम की क्रिकेट चैरिटी चलाते हैं.

ऐसे कई प्रमाण मौजूद हैं जिनसे पता चलता है कि  क्लब सिस्टम से इतर नई प्रतिभाओं को खोजने के लिए यह तरीक़ा कारगर साबित हो सकता है, जैसे कि मोईन अली. मोईन देश के अंदरूनी इलाक़े में क्रिकेट खेलते थे. वे प्रतिभाशाली क्रिकेट खिलाड़ियों की खोज के अभियान का पहला उदाहरण हैं.वसीम खान मानते हैं कि इंग्लैंड में ऐसे कई और मोईन अली हैं. वह कहते हैं, "मुझे उम्मीद है कि आने वाले सालों में ऐसी ही कई और छिपी हुई प्रतिभाएं सामने आएंगी."

 

Posted By: Subhesh Sharma