त्रिवेणी ने समेट लिया आस्था का समंदर

2016-02-09T02:10:21Z

- मौनी अमावस्या पर सवा करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई पुण्य की डुबकी

- दिन भर उमड़ता रहा रेला, संगम पर नहीं मिली तिल रखने की जगह

ALLAHABAD:

भक्ति के रंग में रंगल गांव देखा

धरम के करम में सनल गांव देखा

अगल में बगल में सगर गांव देखा अमौसा नहाये चलल गांव देखा

प्रख्यात कवि कैलाश गौतम के काव्य की ये पंक्तियां सोमवार को माघ मेला क्षेत्र के कण-कण में बस गई। माघ से सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर आस्था की गठरी समेटे संगम तट पहुंचे सवा करोड़ श्रद्धालुओं ने इसे साकार कर दिया। मौन के साथ सोमवती अमावस्या पर पुण्य की डुबकी लगाने के लिए श्रद्धालुओं, कल्पवासियों, साधु संतों सहित धर्माचार्यो में भी होड़ देखी गई।

भोर से ही शुरू हुई डुबकी

मौनी अमावस्या की पूर्व संध्या से ही माघ मेला क्षेत्र में लाखों श्रद्धालु पहुंच चुके थे और सोमवार भोर से ही पुण्य की डुबकी लगाने का सिलसिला शुरू हो गया। दूसरे प्रदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु संगम तट पर त्रिवेणी में डुबकी लगाने के लिए पहुंचते रहे। प्रशासनिक अनुमान के मुताबिक सुबह दस बजे तक ही करीब 75 लाख श्रद्धालुओं ने संगत तट पर स्नान कर लिया।

दोपहर को ही एक करोड़ पार

इसके बाद भी रेला बढ़ता गया और दोपहर 12 बजे तक श्रद्धालुओं के संगम तट पर पहुंचकर डुबकी लगाने का आंकड़ा एक करोड़ को पार कर गया। शाम चार बजे तक एक करोड़ 20 लाख लोगों ने संगम में डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया। यह सिलसिला देर शाम तक चलता रहा।

ठहरने की नहीं दी इजाजत

मौनी अमावस्या पर प्रशासन का अनुमान 90 लाख लोगों के स्नान करने के लिए पहुंचने का अनुमान था। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया गया था। लेकिन सवा करोड़ श्रद्धालुओं की भीड़ ने प्रशासन के पसीने छुड़ा दिए। क्राउड मैनेजमेंट के चलते श्रद्धालुओं को चलते रहने के लिए प्रेरित किया गया। जगह-जगह हो रहे एनांउसमेंट में बार बार कहा जा रहा था कि श्रद्धालु चलते फिरते नजर आएं, ताकि भगदड़ की स्थित पैदा ना हो सके। यहां तक की संगम नोज पर स्नान के बाद सुस्ताते श्रद्धालुओं को भी वहां से हटाया जाता रहा।

महास्नान का महत्व

ज्योतिषाचार्य अमित बहोरे के अनुसार स्नान पर्व मौनी अमावस्या पर मौन रहकर डुबकी लगाने का पुण्य लाभ मिलता है। चन्द्रमा मन और सूर्य को आत्मा का स्वामी ग्रह माना गया है। और इस महास्नान पर्व पर सूर्य और चंद्रमा के एक साथ मकर राशि में संचरण करने से मन और आत्मा के बीच संयोग बनता है। इस बार सोमवार को मौनी अमावस्या पड़ने के कारण इसका महत्व अधिक था। इसलिए लाखों की संख्या में लोगों ने संगम तट पर पहुंचकर पुण्य की डुबकी लगाई।


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