सरकारी अस्पतालों की दयनीय दशा पर मुख्य सचिव से मांगा हलफनामा

2019-01-11T06:00:16Z

प्रमुख सचिव मेडिकल शिक्षा व मोती लाल नेहरू मेडिकल कालेज के प्राचार्य को हाजिर होने का निर्देश

prayagraj@inext.co.in

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश की चिकित्सा व्यवस्था की खस्ता हालत के सुधार के निर्देशों पर कार्यवाही रिपोर्ट के साथ मुख्य सचिव से दो हफ्ते में हलफनामा मांगा है और कहा है कि हलफनामा न देने पर वे स्वयं 29 जनवरी को हाजिर हों। कोर्ट में फर्जी हलफनामा देने के मामले में दी गयी सफाई को संतोषजनक न मानते हुए कोर्ट ने प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा रजनीश दूबे एवं प्राचार्य मोती लाल नेहरू मेडिकल कालेज डॉ। एसपी सिंह को भी तलब किया है।

जनहित याचिका पर दिया फैसला

यह आदेश जस्टिस सुधीर अग्रवाल तथा अजीत कुमार की खंडपीठ ने स्नेहलता सिंह व अन्य की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। उच्च न्यायालय कर्मचारी अधिकारी संघ की तरफ से दाखिल अर्जी पर कोर्ट ने विस्तृत ब्यौरा दाखिल करने का समय दिया है। एसोसिएशन के अधिवक्ता संतोष कुमार त्रिपाठी ने कोर्ट से पूर्व में पारित आदेश को शिथिल करने की मांग की। इनका कहना कि कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों को सरकारी अस्पतालों में ही इलाज कराने के खर्च की सरकार से भरपायी का निर्देश दिया है। सरकारी अस्पतालों की हालत गंभीर बीमारियों का इलाज करने लायक नहीं है। उन्हें मजबूरन प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना पड़ रहा है।

कोर्ट का डायरेक्शन

रोड मैप तैयार कर मेडिकल, पैरा मेडिकल स्टॉफ व अन्य स्टाफ की खाली पदों को भरा जाय

सभी मेडिकल केयर सेन्टर पर दवाएं उपलब्ध करायी जाय

फण्ड का आडिट कराया जाय, ट्रामा सेन्टरों की सुविधाएं दी जाय

सरकारी डाक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक की विजिलेन्स जांच करायी जाय

मोती लाल नेहरू मेडिकल कालेज की स्पेशल आडिट करायी जाय.महानिदेशक विजिलेन्स जांच करे


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