भारत में भले ही अभी थ्री जी मोबाइल कनेक्टिविटी बहुत मज़बूत न बन पाई हो लेकिन ब्रिटेन में अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों से वीडियो भेजना 2014 तक हक़ीक़त बन सकता है.


ब्रिटेन में संचार पर नियंत्रण रखने वाली संस्था 'ऑफकॉम' ने विमानों, ट्रेनों और जहाज़ों के लिए नए सेटेलाइट सिस्टम का लाइसेंस देने का प्रस्ताव रखा है.अभी यात्रियों को जिस रफ़्तार का इंटरनेट उपलब्ध है 2014 में उससे 10 गुना तेज़ इंटरनेट स्पीड मिल सकती है और ये सब संभव हो सकेगा अर्थ स्टेशंस ऑन मोबाइल प्लेटफ़ॉर्म यानी 'इसोम्प्स' से.हालांकि अभी ब्रिटेन की एयरलाइन कंपनियों ने ये संकेत नहीं दिए हैं कि वो इस तकनीक का इस्तेमाल करेंगी या नहीं.ब्रिटिश एयरवेज़ का कहना है कि वो इन गतिविधियों पर बारीकी से नज़र रखे हुए है. ऑफकॉम ने स्थिर उपग्रह डिश सिस्टम के अधिकार देने पर पिछले हफ़्ते चर्चा शुरू की है. इसमें हाई फ़्रीक्वेंसी बैंड का इस्तेमाल होता है.'व्यावसायिक फैसला'
कई व्यवसायिक सेटेलाइट ऑपरेटर अगले कुछ महीनों में ऐसे नेटवर्क शुरू करने की योजना बना रहे हैं जिनमें 'इसोम्प्स' का इस्तेमाल होता है.ऑफकॉम के एक प्रतिनिधि ने कहा कि एयरलाइन कंपनियों को "एक व्यावसायिक फ़ैसला" लेना होगा कि वो नए सिस्टम का इस्तेमाल करेंगी या नहीं.


ब्रिटिश एयरवेज़ में उड़ान में मनोरंजन और तकनीक के मैनेजर रिचर्ड डी'क्रूज़ का कहना है कि "उनकी एयरलाइन की कनेक्टिविटी बाज़ार के उपग्रह और सीधे आसमान से ज़मीन पर संचार के क्षेत्र में हो रही गतिविधियों पर बारीकी से नज़र है."ऑफकॉम का कहना है कि वो अपने यूरोपीय समकक्षों के साथ इस मसले पर पिछले दो साल से काम कर रही है, इनमें फ़्रांस, जर्मनी, लक्समबर्ग भी शामिल हैं जो अपने नियम लागू करने की प्रक्रिया में हैं.अमरीका में फ़ेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन ने 'इसोम्प्स' के इस्तेमाल को मंज़ूरी दे दी है.ब्रॉडबैंड के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट थिंकब्रॉडबैंड डॉट कॉम के संपादक एंड्र्यू फ़र्ग्यूसन ने बीबीसी से कहा, "नए सिस्टम की ज़्यादा लागत उन यात्रियों को चुकानी पड़ सकती है जो इंटरनेट का काफ़ी इस्तेमाल करते हैं, जो इसकी जगह थ्री जी और फोर जी मोबाइल विकल्पों का इस्तेमाल करते."उनका कहना है, "यूनाइटेड किंगडम के जिन इलाकों को इसका फ़ायदा हो सकता है वो ऐसे इलाके हैं जहां थ्री जी कनेक्टिविटी अभी बहुत ख़राब है या है ही नहीं."एंड्र्यू फर्ग्यूसन मानते हैं कि "अगर चर्चा का नतीजा वाकई इस उपग्रह आधारित मोबाइल कनेक्टिविटी के रूप में होता है तो पूरी दुनिया एक और कदम करीब आ जाएगी और विमानों में यात्रा करने वाले लोगों को अपने साथी यात्रियों की तेज़ आवाज़ वाली कॉल को झेलना होगा."

Posted By: Satyendra Kumar Singh