सिर्फ रोस्टर बना न फॉगिंग हुई न मच्छरों की संख्या हुई कम. हेल्पलाइन नंबर से भी नहीं मिल रही मदद. मलेरिया के साथ इरीटेशन भी फैला रहे हैं मच्छर नींद गायब. 11 मशीनों के भरोसे पूरी सिटी में फॉगिंग. 53 वार्ड में मच्छरों से निजात पाना चुनौती.

रांची(ब्यूरो)। एक ओर गर्मी का प्रकोप बढ़ रहा है तो दूसरी ओर मच्छरों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। मच्छरों की बढ़ती संख्या के आगे नगर निगम के सारे दावे फेल नजर आते हैं। कुछ दिनों पहले ही नगर निगम ने फॉगिंग कराने और दवा का छिड़काव करने को लेकर रोस्टर जारी किया था, लेकिन कितनी जगह दवा का छिड़काव हुआ, इसकी सूची निगम के पास भी नहीं है। इसे लेकर नगर निगम ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया था, लेकिन यहां से भी लोगों को कोई मदद नहीं मिल रही है। सिर्फ कुछ वीआईपी इलाकों, मॉल, मल्टी स्टोरी बिल्डिंग, सरकारी कार्यालय को छोड़ अन्य किसी इलाके में फॉगिंग नहीं कराई गई। इन दिनों मच्छर बीमारी से ज्यादा लोगों को इरीटेट कर रहे हैं।
सिर्फ दिखावे की फॉगिंग
गर्मी का मौसम आते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। इस कारण अस्पतालों में कतारें भी लगनी शुरू हो गई हैं। राजधानी रांची को स्मार्ट सिटी की श्रेणी में रखा गया है, लेकिन सिटी की जनता को मच्छरों से निजात दिलाना भी नगर निगम के लिए चुनौती साबित हो रहा है। बीते करीब एक साल से नगर निगम क्षेत्र में कोई जनप्रतिनिधि नहीं है। निकाय चुनाव नहीं होने के कारण वार्ड काउंसेलर का चयन नहीं हो सका है, जिससे इलाके के कई काम लटक रहे हैं। इसमें एक फॉगिंग भी शामिल है। गर्मी के मौसम में मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है। शिकायत के बाद निगम की ओर से कुछ इलाकों में फॉगिंग कराई गई, लेकिन वह नाकाफी साबित हो रही है। नियमित फॉगिंग नहीं होने से मच्छरों का पनपना बंद नहीं हो रहा है।
एक मशीन के भरोसे 53 वार्ड
मच्छरों से निपटने के लिए नगर निगम के पास 11 फॉगिंग मशीन हैं। इनमें 9 कोल्ड फॉगिंग और 2 थर्मल फॉगिंग मशीन हैं। इन्हीं मशीनों से पूरे 53 वार्ड में काम चलाया जा रहा है। सिर्फ नौ मशीन से पूरे निगम क्षेत्र में दवा का छिड़काव करना असंभव है। इन नौ मशीनों में दो से तीन मशीन अक्सर खराब ही रहती हैं। ऐसे में हर इलाके में फॉगिंग नहीं हो पा रही है। निगम कर्मियों का कहना है कि एक वार्ड में ही फॉगिंग करने में पूरा दिन निकल जाता है। नगर निगम के पास जरूरत के हिसाब से पर्याप्त फॉगिंग मशीन नहीं है। शहर में मच्छरों की रोकथाम के लिए निगम को और फॉगिंग मशीन की जरूरत है। 2011 की जनगणना के मुताबिक, राजधानी के सभी वार्डों में 11 लाख की आबादी थी। पिछले 12 साल में आबादी में बेतहाशा वृद्धि हुई है। लेकिन सुविधाओं में कोई खास इजाफा नहीं किया गया। जनसंख्या के अनुरूप न फॉगिंग मशीनों की संख्या बढ़ाई गई और न ही जो मशीनें उपलब्ध हैं, उनसे काम लिया जा रहा है।
क्या कहती है पब्लिक
होली के पहले से ही मच्छरों से परेशानी बढऩी शुरू हो गई है। निगम से बार-बार आग्रह करने के बावजूद फॉगिंग का काम बहुत लेट से शुरू किया गया है। इससे परेशानी बढ़ गई है। नगर निगम के पास जरूरत के हिसाब से पर्याप्त फॉगिंग मशीन नहीं हैं। शहर में मच्छरों की रोकथाम के लिए निगम को और फॉगिंग मशीन की जरूरत है।
-अरुण कुमार झा, निवर्तमान पार्षद

मच्छरों ने तो घर में रहना मुश्किल कर दिया है। शाम ढलते ही मच्छर गुनगुनाने लगते हैं। काटने से ज्यादा ये इरीटेट करते हैं। लेकिन काट लें तो फिर अस्पताल भी पहुंचा सकते हैं।
- अमित

बहुत बुरा हाल है। घर में छोटे-छोटे ब'चे हैं। हर वक्त बीमारी का डर लगा रहता है। मच्छरों के प्रकोप के कारण दिन में भी ब'चों को मच्छरदानी में ही रखते हैं।
-संतोष

यह तो सही है कि पहले से मच्छरों की संख्या में इजाफा हुआ है। इसकी वजह गर्मी के साथ-साथ गंदगी भी है। दवा का छिड़काव होने से राहत मिलेगी।
-रंजीत

फॉगिंग के लिए वार्ड वाइज रोस्टर तैयार किया गया है। इसका पालन भी कराया जा रहा है। हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है, कोई भी व्यक्ति संपर्क करके अपने इलाके में फॉगिंग करा सकता है।
-सौरभ प्रसाद, एएमसी, रांची

Posted By: Inextlive