कार्तिक पूर्णिमा 2018: देव दीपावली के व्रत से मिलता है अनंत फल, जानें इसका महत्व

Updated Date: Thu, 22 Nov 2018 12:41 PM (IST)

कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली कहते हैं। निर्णयसिन्धु के अनुसार 'इयं परा ग्राह्या' होने से इस वर्ष देव दीपावली शुक्रवार 23 नवम्बर 2018 को मनायी जायेगी।

कार्तिक पूर्णिमा को देव दीपावली कहते हैं। निर्णयसिन्धु के अनुसार, 'इयं परा ग्राह्या' होने से इस वर्ष देव दीपावली शुक्रवार, 23 नवम्बर 2018 को मनायी जायेगी। इसको ब्रह्मा, विष्णु, शिव, अंगिरा और आदित्य आदि ने महापुनीत पर्व प्रमाणित किया है। अतः इसमें किये हुए स्नान, दान, होम यज्ञ और उपासना आदि का अनन्त फल मिलता है।

इस दिन हुआ था मत्स्यावतार 


इस दिन कृत्तिका हो तो 'महाकार्तिकी' होती है। कृत्तिका 23 नवम्बर को सायं 5:52 तक है, उसके बाद रोहिणी लग जाने से इसका महत्व बढ़ जाता है। इसी दिन सायं काल के समय मत्स्यावतार हुआ था। इस कारण इसमें दिए हुए दानादि का दस यज्ञों के समान फल मिलता है।

कार्तिकी को संध्या के समय 

'कीटाः पतंगाः मशकाश्च वृक्षे जले स्थले ये विचरन्ति जीवाः।

दृष्ट्वा प्रदीपं न हि जन्मभागिनस्ते मुक्तरूपा हि भवन्ति तत्र।।

से दीप दान करें तो पुनर्जन्मादि का कष्ट नहीं होता।

कार्तिकेय के दर्शन से होंगे धनवान


स्कन्दपुराण के काशीखण्ड के अनुसार, यदि इस दिन कृत्तिका में स्वामी (कार्तिकेय) का दर्शन किया जाय तो ब्राह्मण सात जन्म तक वेदपारग और धनवान होता है।

ऐसा करने से बढ़ेगा शौर्य, वीर्यादि और धैर्य

ब्रह्मा पुराण के अनुसार, इस दिन चन्द्रोदय के समय शिवा, सम्भूति, प्रीति, संतति, अनसूया और क्षमा- इन छः तपस्विनी कृत्तिकाओं का पूजन करें (क्योंकि ये स्वामिकार्तिक की माता हैं।) और कार्तिकेय, खंगी(शिवा) वरुण, हुताशन और बालियुक्त धान्य ये सायंकाल द्वार के ऊपर शोभित करने योग्य है; अतः इनका उत्कृष्ट गन्ध-पुष्पादि से पूजन करें तो शौर्य, वीर्यादि, धैर्य बढ़ते हैं।

इस दिन सुनते हैं सत्य नारायण की कथा

जो व्यक्ति पूरे कार्तिक मास स्नान करते हैं, उनका नियम कार्तिक पूर्णिमा को पूरा हो जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन प्राय: श्रीसत्यनारायणव्रत की कथा सुनी जाती है। सायं काल देव मन्दिरों, चौराहों, गलियों, पीपल के वृक्षों तथा तुलसी के पौधों के पास दीपक जलाये जाते हैं और गंगा जी को दीपदान किया जाता है। काशी में यह तिथि देव दीपावली महोत्सव के रूप मे मनायी जाती है।

मत्स्यपुराण के अनुसार, कार्तिकी को नक्तव्रत करके वृष दान करें तो शिवपद प्राप्त होता है। यदि गौ, गज, रथ, अश्व और घृतादि का दान किया जाय तो सम्पत्ति बढ़ती है।

ब्रह्मपुराण के अनुसार, कार्तिकी को उपवास सहित हरिस्मरण करें तो अग्निष्टोम के समान फल होकर सूर्य लोक की प्राप्ति होती है। कार्तिकी को सुवर्णमय भेड़ का दान करें तो ग्रह योग के कष्ट नष्ट हो जाते हैं।

— ज्योतिषाचार्य पं गणेश प्रसाद मिश्र

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Posted By: Kartikeya Tiwari
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