LeT, जैश व अन्य आतंकी समूह जिहादियों की भर्ती के लिए कोरोना वायरस महामारी का कर रहे हैं इस्तेमाल

Updated Date: Mon, 13 Apr 2020 03:12 PM (IST)

पूरी दुनिया कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में डटी है। वहीं दूसरी ओर आतंकी समूह इस समय का फायदा उठाकर जिहादियों की भर्ती करने में जुटे हैं।

ब्रुसेल्स/एम्स्टर्डम, बेल्जियम (एएनआई) पश्चिमी आतंकवाद-रोधी पर्यवेक्षक, पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी), जैश-ए-मोहम्मद (जेएम) और हिजबुल मुजाहिदीन (एचएम) जैसे अन्य आतंकवादी संगठनों को कोरोना वायरस बीमारी का इस्तेमाल करके जिहादियों की भर्ती करते हुए देख रहे हैं। ब्रसेल्स स्थित थिंक-टैंक, दक्षिण एशिया डेमोक्रेटिक फ्रंट के शोध निदेशक डॉ। सिगफ्रीड वुल्फ ने कहा, 'जिहादी समूहों की दक्षिण एशिया में, विशेषकर पाकिस्तान-अफगानिस्तान क्षेत्र में उनकी आतंकवादी गतिविधियों, भर्ती और प्रचार अभियानों के लिए संकट की स्थितियों का फायदा उठाने की एक पुरानी परंपरा है। कोरोना वायरस की वजह से हजारों युवा अपनी नौकरी खो चुके हैं और इस वक्त आतंकी संगठन लोगों की भर्ती के लिए इस बात का पूरा फायदा उठा रहे हैं।'

युवाओं को पैसों की जरुरत

ऐसे युवा लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद, एचएम और अन्य के लिए आसान शिकार हैं जो उन्हें इन कठिन समय में भोजन व कुछ पैसे दे रहे हैं। वुल्फ ने कहा, 'कोरोना वायरस महामारी को लेकर पहले से ही एक असाधारण चुनौती का सामना करना पड़ रहा है, राज्य और उनके समाज दैनिक जीवन के सभी पहलुओं में विशेष रूप से कमजोर हैं। इसके बारे में जागरूक होने के नाते, आतंकवादी अधिकतम भय उत्पन्न करने और अपने हिंसक और मौखिक हमले के साथ संकट को और बढ़ाने के लिए इन स्थितियों का फायदा उठाने की कोशिश करते हैं।' वुल्फ ने आगे एएनआई को बताया, 'पाकिस्तान में भी जिहादी सरकार को कमजोर करने के लिए संकट का उपयोग कर रहे हैं, उदाहरण के लिए लॉकडाउन और सोशल डिस्टैन्सिंग नियमों की अनदेखी करके। तथ्य यह है कि पाकिस्तान का प्रशासन नागरिक संकट की स्थिति को संभालने के लिए सक्षम नहीं है और यह देश की राजनीतिक संस्कृति की सबसे दुर्भाग्यपूर्ण विशेषताओं को सामने लाता है और धार्मिक कट्टरपंथियों को जिहादी प्रचार प्रसार में अपने प्रयासों को बढ़ाने में मदद करता है।

पहले से ही ऐसा करते आ रहे हैं आतंकी समूह

पाकिस्तान विभिन्न इस्लामिक जिहादी संगठनों जैसे लश्कर-ए-तैयबा, हक्कानी नेटवर्क, तालिबान, जैश-ए मोहम्मद और अन्य का घर है। एएनआई से बात करते हुए, एम्स्टर्डम स्थित यूरोपीय फाउंडेशन फॉर साउथ एशियन स्टडीज के निदेशक जुनैद कुरैशी ने कहा, 'यह निश्चित रूप से सीखने के लिए भयावह है कि जब दुनिया कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ रही है, वहीं आतंकवादी समूह अपने एजेंडे और भर्ती नीतियों को आगे बढ़ाकर इस उथल-पुथल और अशांत समय का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, यह आश्चर्य की बात नहीं है क्योंकि आतंकवादी समूह पहले से ही ऐसा करते आए हैं।'

Posted By: Mukul Kumar
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