महिला आयोग में हो रहा स्टाफ का शोषण

2015-01-26T07:01:13Z

- स्टाफ की कमी से जूझ रहा है राज्य महिला आयोग

PATNA : बिहार राज्य महिला आयोग में हप्ते के पांच दिन ढेरों मामले की सुनवाई होती है। पूरे स्टेट से महिलायें आती हैं लेकिन किसी भी दिन अगल आप सुनवाई सुनने चले जाते हैं तो एक नाम खूब सुनाई देंगे। संगीता पानी लाओ, संगीता फाइल लाओ, संगीता विनीता को बुलाओ। यह आवाज आयोग की हर सदस्य लगाती हैं। बीच बीच में गार्ड भी आकर कह जाता है संगीता अध्यक्ष मैडम बुला रही हैं। संगीता आयोग में पिउन हैं और ऐसा सिर्फ संगीता के साथ नहीं होता है। वहां के हर स्टाफ के साथ ऐसी ही परेशानी है। हर स्टाफ से हर तरह का काम लिया जाता है।

आयोग में नहीं हैं पर्याप्त स्टाफ

आयोग में कुल सात सदस्य हैं और एक अध्यक्ष। इन सबों के लिये और आयोग के ऑफिस वर्क के लिये मात्र चार स्टाफ हैं। इनमें से दो कम्प्यूटर ऑपरेटर और दो प्यून हैं और इन्हीं के भरोसे आयोग का सारा काम है। आयोग के सदस्यों को पीए तक नहीं दिया गया है। इस वजह से मामले को निपटाने में परेशानी होती है। इस बात को आयोग की हर सदस्य स्वीकारती हैं। मालूम हो कि आयोग में स्टाफ की संख्या को बढ़ाने की मांग लंबे समय से की जाती रही है। कहकशां प्रवीण के समय से ही यह मांग उठ रही है। अभी हाल में हुई आयोग की आंतरिक बैठक में भी सदस्यों ने पीए हाने और स्टाफ की संख्या और हो की मांग की।

बॉक्स आइटम

एक जनवरी से लेकर फ्क् दिसंबर ख्0क्ब् तक आयोग में फ्ख्7भ् मामले आये। इसमें से दहेज हत्या के 98 मामले थे और दहेज उत्पीड़न के 8फ्ख् मामले आये। वहीं बलात्क ार के भ्ख् मामले और जमीन संबंधी ब्ब्भ् मामले आये और घरेलू हिंसा के क्ख्क्भ् मामले दर्ज किये गये।


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