मकर संक्रांति 2019 सूर्य उपासना से मिलेगी शनि के प्रकोप से मुक्ति दिनरात की संक्रांति इनके लिए होती है कष्टकारक

2019-01-14T11:51:28Z

ज्योतिषत शास्त्र के अनुसार मकर संक्रांति के स्वामी सूर्य पुत्र शनि देव हैं। शनि के प्रकोप से मुक्ति पाने के लिए इस दिन की गई सूर्योपासना महा शुभ है।

इस वर्ष सोमवार को मकर संक्रांति होना विशेष महत्वपूर्ण है क्योंकि इस वर्ष के राजा भी शनि हैं साथ ही मंत्री भी सूर्य देव हैं। मकर संक्रांति अयन संक्रांति होने के कारण अति महत्वपूर्ण है। इस वर्ष सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी 2019 संध्या कालीन 07:52 बजे होगा, इस वर्ष मकर संक्रांति के समय ’’आश्विनी नक्षत्र” एवं ’’सिद्ध योग” रहेगा, जिसके देवता अश्विनी कुमार एवं गण ’’देव” है जिसका फल शुभ होना बताया गया है।

ज्योतिषत शास्त्र के अनुसार, मकर संक्रांति के स्वामी सूर्य पुत्र शनि देव हैं। शनि के प्रकोप से मुक्ति पाने के लिए इस दिन की गई सूर्योपासना महा शुभ है। मत्स्य पुराण के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्योपासना के साथ यज्ञ, हवन एंव दान को पुण्य फलदायक माना गया है।

इन चीजों के लिए विशेष होती है मकर संक्रान्ति

शिव रहस्य ग्रन्थ में मकर संक्रान्ति के अवसर पर हवन पूजन के साथ खाद्य वस्तुओं में तिल एवं तिल से बनी वस्तुओं का विशेष महत्व बताया गया है। पुराणों के अनुसार मकर संक्रान्ति सुःख शान्ति, वैभव, प्रगति सूचक, जीवों में प्राण दाता, स्वास्थ्यवर्धक, औषधियों के लिए वर्णकारी एवं आयुर्वेद के लिए विशेष है।

दिन और रात में संक्रांति होने पर इन पर पड़ता है प्रभाव


यदि संक्रांति दिन में हो तो प्रथम तृतीयांश में क्षत्रियों को, दूसरे तृतीयांश में ब्राह्मणों को, तीसरे तृतीयांश में वैश्यों को और सूर्यास्त के समय की संक्रांति शूद्रों के लिए कष्टप्रद होती है।

इसी प्रकार रात्रि के प्रथम प्रहर की संक्रांति घृणित कर्म करने वालों को, दूसरे प्रहर की संक्रांति राक्षसी प्रवृत्ति के लोगों को, तीसरे प्रहर की संक्रांति संगीत से जुड़े लोगों को, चौथे प्रहर की संक्रांति किसान, पशुपालक और मज़दूरों के लिए दुखदायी होती है।

मकर संक्रान्ति प्रायः माघ मास में आती है परन्तु इस वर्ष मकर संक्रान्ति पौष माह में पड़ रही है। 

मकर संक्रांति का दान

मकर संक्रांति के दिन स्नान और दान का अति विशेष महत्व है पदमपुराण के अनुसार, इस संक्रांति में दान से करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन भगवान सूर्य को लाल वस्त्र, गेंहू, गुड़, मसूर दाल, तांबा, स्वर्ण, सुपारी, लाल फल, लाल फूल, नारियल, दक्षिणा आदि दान का शास्त्रों में विधान है।

मकर संक्रांति का महत्व


शास्त्र के अनुसार ऐसा माना जाता है कि कर्क संक्रांति के समय सूर्य का रथ दक्षिण की ओर मुड़ जाता है। इससे सूर्य का मुख दक्षिण की ओर तथा पीठ हमारी ओर होती है। इसके विपरीत मकर संक्रांति के दिन से सूर्य का रथ उत्तर की ओर मुड़ जाता है अर्थात् सूर्य का मुख हमारी ओर (पृथ्वी की तरफ) हो जाता है। फलतः सूर्य का रथ उत्तराभिमुख होकर हमारी ओर आने लगता है। सूर्यदेव हमारे अति निकट आने लगते हैं।

मकर संक्रान्ति सूर्य उपासना का अत्यन्त महत्वपूर्ण, विशिष्ट एवं एकमात्र महापर्व है। यह एक ऐसा पर्व है जो सीधे सूर्य से संबंधित है। मकर से मिथुन तक की 6 राशियों में 6 महीने तक सूर्य उत्तरायण रहते हैं तथा कर्क से धनु तक की 6 राशियों में 6 महीने तक सूर्य दक्षिणायन रहते हें। कर्क से मकर की ओर सूर्य का जाना दक्षिणायन तथा मकर से कर्क की ओर जाना उत्तरायण कहलाता है।

सनातन धर्म के अनुसार उत्तरायण के 6 महीनों को देवताओं का एक दिन और दक्षिणायन के 6 महीनों को देवताओं की एक रात्रि माना गया है।

- ज्योतिषाचार्य पं राजीव शर्मा    

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