सेवा सत्कार व समभाव की त्रिवेणी

2015-02-03T07:01:56Z

- अन्नक्षेत्र में मानव सेवा का हर जतन, ओम वाहि गुरू आश्रम में तृप्त हो रहे श्रद्धालु

- आश्रम में पहुंचने वाले के भोजन से लेकर स्वास्थ्य देखभाल की भी व्यवस्था

अन्नक्षेत्र में मानव सेवा का हर जतन, ओम वाहि गुरू आश्रम में तृप्त हो रहे श्रद्धालु

- आश्रम में पहुंचने वाले के भोजन से लेकर स्वास्थ्य देखभाल की भी व्यवस्था

ALLAHABAD: ALLAHABAD@inext.co.in

ALLAHABAD: गंगा यमुना व अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी में रेती पर सेवा सत्कार व समभाव की भी त्रिवेणी बह रही है। मानव सेवा की यह सरिता बह रही है, ओम वाहि गुरू के आश्रम में। यहां पहुंचने वाला कोई भी श्रद्धालु हर तरह से तृप्त होकर लौटता है। तंबुओं की नगरी में अन्न क्षेत्र तो कई हैं, उनकी सेवा भावना भी सराहनीय है। लेकिन वाहि गुरू आश्रम में पहुंचने वाले सेवाभाव की पराकाष्ठा का अनुभव लेकर ही लौटते हैं। क्योंकि आश्रम की श्रद्धालुओं के भोजन के साथ ही बीमारों के इलाज की भी निशुल्क व्यवस्था की गई है। खास बात यह कि इन के लिए हर व्यक्ति खास होता है। ओम वाहि गुरू आश्रम के व्यवस्थापक सत्यम हरबंस ने बताया कि आश्रम की ओर से पूरी सेवा प्रमुख संत श्रीहरबंस साहिब जी के सानिध्य में की जा रही है। माघ मेले में आश्रम की ओर से सुबह चाय-नास्ता, दोपहर का भोजन और रात के भोजन की व्यवस्था की गई है।

मेले के ख्भ् अन्नक्षेत्र को ले रखा है गोद

आश्रम की ओर से चलाये जा रहे अन्नक्षेत्र के अलावा मेले में चल रहे ख्भ् ऐसे अन्न क्षेत्र हैं जिनको आश्रम ने गोद ले रखा है। इन अन्न क्षेत्र में आश्रम की ओर से उनकी आवश्यकता अनुसार सामान की व्यवस्था करायी जाती है। इसके साथ ही मेले में बने आश्रम के अन्तर्गत चल रहे अन्नक्षेत्र में प्रतिदिन पांच टन आटा, क्700 किलो दाल व 800 लीटर दूध की खपत हो रही है। पंडाल में आने वाले सभी भक्तों को एक समान रूप से प्रसाद का वितरण किया जाता है।

झूंसी में गोद लेंगे गांव

उन्होंने बताया कि झूंसी के पास आश्रम खोलने और क्षेत्र के एक गांव को गोद लेने की प्लानिंग पर भी वर्क किया जा रहा है। अभी तक आश्रम की ओर से यूपी, राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, चण्डीगढ़ के सौ गांवों को गोद लिया जा चुका है। इन गांवों में आश्रम की ओर से गरीब व असहाय लोगों के लिए इलाज की व्यवस्था के साथ ही गांव का आदर्श ग्राम बनाने के लिए भी सभी सुविधाएं दी जाती हैं। इसमें नि:शुल्क विद्यालय से लेकर बेरोजगारों को रोजगार परक शिक्षा और उन्हें जॉब दिलाने की व्यवस्था भी आश्रम की ओर से कराई जाती है। इसके साथ ही आश्रम ग्राम प्रधान की मदद से गरीब लोगों के लिए राशन कार्ड भी बनवाता है। इन राशन कार्ड के आधार पर लोगों को अनाज की व्यवस्था भी आश्रम की ओर से की जाती है।

Posted By: Inextlive

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