Mirzapur 2 Review: मिर्जापुर 1 के भौकाल को औसत करती मिर्जापुर 2

Updated Date: Fri, 23 Oct 2020 03:45 PM (IST)

मिर्जापुर 2 को लेकर वेब की दुनिया में पूरा भौकाल है। लंबे समय से दर्शक इसके दूसरे सीजन को लेकर उत्सुक थे। मुन्ना भईया गुड्डू भईया और कालीन भईया की तिकड़ी इस बार कमाल तो दिखाई है लेकिन पहले वाले मिर्जापुर से थोड़ा कम। डायलॉग बहुत दमदार हैं लेकिन स्क्रीनप्ले ऐसा बना है कि पता होता है कि आगे क्या होने वाला है। मिर्जापुर 2 बदले की कहानी है। एक बहन और एक भाई और एक प्रेमिका के खून का बदला। दस एपिसोड के बजाय कुछ कम एपिसोड में भी इस कहानी को पूरा किया जा सकता था। हालांकि अगला सीजन भी आएगा ये क्लू दे दिया गया है।बाकी मेकर्स ने मार्केटिंग में खूब भौकाल कर ही रखा है। पढ़ें पूरा रिव्यु

वेब सीरीज का नाम : मिर्जापुर 2
कलाकार : पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु शर्मा, श्वेता त्रिपाठी, रसिका दुग्गल, विजय वर्मा, कुलभूषण खरबंदा, मेघना नायडू इत्यादि
सीरीज निर्देशक : गुरमीत सिंह, मिहिर देसाई, पुनीत कृष्णा
कुल एपिसोड : दस
रेटिंग : तीन स्टार
ओटी टी चैनल : अमेजॉन प्राइम वीडियो

क्या है कहानी
कहानी सीजन 1 में जहां पर खत्म हुई थी, वहीं से शुरू होती है। कहानी मिर्जापुर से निकल कर लखनऊ पहुंचती है। बबलू पंडित( विक्रांत मेसी ) और स्वीटी (श्रिया ) को मुन्ना त्रिपाठी (दिव्येंदु ) मार देता है। गुड्डू पंडित (अली फजल ) और गोलू (श्वेता त्रिपाठी )बच जाते हैं। फिर शुरू होती है बदले की कहानी, लेकिन जैसे-जैसे बदले की कहानी आगे बढ़ती है, कई राज खुलते जाते हैं। नए किरदार जुड़ते जाते हैं। गुड्डू पंडित अपनी प्रेमिका की मौत का बदला, मुन्ना और उसके पिता कालीन भईया ( पंकज त्रिपाठी )से लेना चाहता है। इस काम में उसका साथ देती है गोलू।

कहानी में है काफी सस्पेंस
कालीन की पत्नी बीना जी ( रसिका दुग्गल ) को थोड़ा निखरने का मौका मिला है इस बार। अपराध के क्षेत्र में कालीन भईया का दबदबा और बढ़ता जाता है। साथ ही सीरीज में इस बार भी जम कर गालियां भरी गई हैं। कई जगह बेवजह की भी। कहानी में ढेर सारी पैरेलल कहानी भी चलती रहती है। मिर्जापुर से लखनऊ होते हुए, कहानी बिहार भी पहुंची है। वहां अड्डा डॉन ( लिलीपुट ) और उसके जुड़वाँ बेटे भरत-शत्रुघ्न ( विजय वर्मा ) वाली कहानी ठूसी हुई नजर आई है। अम्मा (मेघना) का किरदार कहानी में नया ऐंगल देता है। वहां अच्छा सस्पेंस है। सस्पेंस क्या है। उसके लिए आपको शो देखना होगा। राजनीति, अपराध, सत्ता का लालच, परिवारवाद को जिस तरह लेयर्स में पहले हिस्से में दिखाया गया था, इस बार मेकर्स केवल संवाद पर ही ध्यान दे पाए. कहानी में नहीं।

क्या है अच्छा
कहानी की सबसे खास बात, दमदार संवाद हैं, साथ ही छोटे-छोटे किरदारों पर भी अच्छा काम हुआ है।

क्या है बुरा
काफी लेयर्स और काफी सारी कहानी दिखाने के चक्कर में वेब सीरीज कई जगह भटकी लगी है। किरदारों के लिहाज से छोटे किरदारों के चित्रण में अच्छा काम हुआ है। लेकिन मुख्य किरदारों में कई जगह भटकाव है। बेवजह के बोल्ड सीन ठूसे गए हैं। गालियां ठूसी गई हैं। जैसे इनके बगैर तो सीजन का अस्तित्व ही नहीं होता। ये अलग ही रोमांच है मेकर्स का, जितनी ज्यादा गालियां, बोल्ड दृश्य, उतनी लोकप्रियता।

अदाकारी
इस बार बाजी मारी है मुन्ना भईया यानी दिव्येंदु ने। सबसे शानदार अभिनय उनका ही नजर आया है। पंकज त्रिपाठी ने भी पूरी तरह कमान संभाली है। लेकिन अली फजल में मिर्जापुर 1 की गर्मजोशी कम नजर आई है। श्वेता त्रिपाठी को इतना दमदार किरदार देते हुए, दब्बू क्यों बनाये रखा गया पता नहीं। विजय वर्मा ने भी खास प्रभावित नहीं किया है। लेकिन कम दृश्यों में भी कुलभूषण खरबंदा कमाल कर जाते हैं। मेघना, लिलीपुट और रसिका के हिस्से जितना काम आया है। सबने अच्छा परफॉर्म किया है।

वर्डिक्ट
वेब दुनिया में इस शो की लोकप्रियता चरम सीमा पर है, दर्शकों में इसे लेकर उत्सुकता थी। सो, सीरीज कामयाब ही होगी।

Review By: अनु वर्मा

Posted By: Abhishek Kumar Tiwari
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