जिम्नास्टिक से युवाओं को दे रहे नई उड़ान

2018-11-07T06:00:50Z

-जिम्नास्टिक में सिटी के युवाओं बन रहे प्रेरणा

prayagraj@inext.co.in

PRAYAGRAJ: शहर के युवाओं को जिम्नास्टिक में फर्श से अर्श तक पहुंचाकर उनके जीवन में खुशियों की रौशनी भरने वाले डॉ। यूके मिश्रा आज भी उसी उत्साह के साथ युवाओं के सपनों को उड़ाने देने में लगे हुए हैं। कक्षा सात में पहली बार खेल प्रतियोगिता में पार्टिसिपेट करने वाले डॉ। यूके मिश्रा के बारे में कभी किसी ने नहीं सोचा था पढ़ाई में कॅरियर बनाने वाला छात्र आगे चलकर युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा।

बीएससी में हुआ रुझान

डॉ। यूके मिश्रा बताते हैं कि पहली बार बीएससी के दौरान जिम्नास्टिक के प्रति उनका रुझान हुआ। उसके बाद देखते ही देखते उन्होंने कुछ सालों में जिम्नास्टिक को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। 1968 में बायोकेमिकल में डॉक्ट्रेट की डिग्री के साथ ही वह उसी साल जिम्नास्टिक में नेशनल चैम्पियन बने। 1989 के दौरान उनके मन में यह ख्याल आया कि देश के युवाओं को जिम्नास्टिक जैसे खेलों के प्रति प्रेरित करें उसके बाद शुरू हुआ उनके संघर्ष का दौर।

समर कैंप में ढूंढा टैलेंट

राष्ट्रपति पुरस्कार हासिल करने वाले डॉ। यूके मिश्रा ने 1989 में सिटी में पहली बार जिम्नास्टिक के लिए समर कैंप का आयोजन किया। इस दौरान स्कूलों में जाकर वहां से बच्चों का चयन किया। सालों की मेहनत के बाद 1992 में पहली बार शहर से कोई बच्चा सब जूनियर कैटेगरी में जिम्नास्टिक में नेशनल चैम्पियन बना। इसके बाद यह सिलसिला आज तक जारी है। नेशनल सब जूनियर कैटेगरी में नेशनल चैम्पियन 1992 से आज तक डॉ। यूके मिश्रा के ही स्टूडेंट्स बन रहे हैं।

खेल से बालीवुड तक फैलाई रोशनी

डॉ। यूके मिश्रा की प्रेरणा और ट्रेनिंग के बदौलत दर्जनों युवा आज खेल से लेकर बॉलीवुड तक अपनी रौशनी फैला रहे हैं। डॉ। यूके मिश्रा के शिष्य विकास पाण्डेय, रोहित यादव, मोहित यादव वर्तमान में अमेरिका में जिम्नास्टिक के कोच है। वहीं रोहित जायसवाल 2003 में देश के लिए पहली बार इंटरनेशनल मेडल जीतने वाले खिलाड़ी बने। वहीं सिद्धार्थ निगम जैसे युवा ने बॉलीवुड में आमिर खान की फिल्म धूम-3 डेब्यू किया। वह फिल्म व टीवी इंडस्ट्री में अपनी चमक फैला रहे है। वहीं आशीष कुमार जैसे युवा व‌र्ल्ड जिम्नास्टिक चैम्पियनशिप की तैयारी के लिए उज्बेकिस्तान में ट्रेनिंग कर रहे हैं।

वर्जन

मेरे जीवन का एक ही लक्ष्य है कि आखिरी सांस तक युवाओं को खेल के लिए प्रेरित करूं। जिम्नास्टिक के लिए युवाओं में जोश देखकर अच्छा लगता है।

-डॉ। यूके मिश्रा


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