लोकायुक्त जांच की इंतजार में 640 कंप्लेन

2015-07-27T07:00:39Z

-करीब दो साल से उत्तराखंड लोकायुक्तविहीन

-जनता का विश्वास कायम, पहुंच रहीं शिकायतें

-दो साल में पहुंच चुकी हैं 200 से अधिक कंप्लेंस

>DEHRADUN@inext.co.in

DEHEADUN स्टेट में विपक्ष आपदा राहत घोटाला, कथित सीडी प्रकरण में सीएम के सचिव के शामिल होने जैसे प्रकरणों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाकर सड़कों पर है। वहीं सीएम हरीश रावत को लगता है कि उत्तराखंड भ्रष्टाचार मुक्त स्टेट है। पिछले करीब दो सालों से स्टेट में लोकायुक्त की नियुक्ति न होना, इसी ओर इशारा कर रही है। संभवत: इसीलिए वर्तमान सरकार लोकायुक्त की नियुक्ति भी महसूस नहीं कर रही है। इधर, लोकायुक्त की नियुक्ति करने को लेकर लगातार डिमांड जारी है। संडे को मसूरी में शहीद स्मारक पर राज्य आंदोलनकारी मंच ने लोकायुक्त की मांग को लेकर धरना दिया। सरकार के खिलाफ अपना विरोध-प्रदश्र्1ान जताया।

जस्टिस रजा ने पूरा किया अपना कार्यकाल

अक्टूबर 2002 में जस्टिस एसएचए रजा को पहला लोकायुक्त नियुक्त किया गया। जस्टिस एसएचए रजा ने वर्ष 2008 तक अपना कार्यकाल पूरा किया। इसके बाद हाईकोर्ट को पूर्व न्यायाधीश एमएम घिल्डियाल उत्तराखंड के अगले लोकायुक्त के तौर पर नियुक्त हुए। उन्होंने उत्तराखंड लोकायुक्त का कार्यकाल 2013 तक संभाला। इसी दौरान राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी ने सीएम की कुर्सी संभालते ही उत्तराखंड लोकायुक्त अधिनियम 2013 की घोषणा की। इसके उपरांत 1975 लोकायुक्त, उप लोकायुक्त अधिनियम रिपील (निरीश्रितत) हो गया। हालांकि तत्कालीन लोकायुक्त जस्टिस एमएम घिल्डियाल का एक साल का कार्यकाल बाकी था। लेकिन तत्कालीन सरकार के नए लोकायुक्त एक्ट के कारण लोकायुक्त ने अपनी कुर्सी छोड़ दी थी।

वर्तमान सरकार की तरफ अभी भी साफ नहीं

इसके बाद प्रदेश में कांग्रेस की नई सरकार आई और तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने फिर से नए लोकायुक्त एक्ट ख्0क्ब् की घोषणा कर डाली। प्रदेश में नए चीफमिनिस्टर के तौर पर हरीश रावत ने सत्ता संभाली है, लेकिन सीएम रावत के प्रदेश की सत्ता संभाले डेढ़ साल का वक्त पूरा होने को है। अब तक उत्तराखंड लोकायुक्त पर सरकार की तरफ से कोई स्पष्ट नजरिया साफ नहीं हो पाया है। हालांकि कुछ महीनों पहले सीएम हरीश रावत ने मीडिया में दिए गए बयानों के मुताबिक स्पष्ट किया था कि पूर्ववर्ती केंद्र की मनमोहन सरकार के दौरान बनाए गए लोकपाल एक्ट को उत्तराखंड में एडॉप्ट करने की बात कही थी। लेकिन फिलहाल प्रदेश सरकार की तरफ से नए लोकायुक्त एक्ट व लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर काेई कदम नहीं उठाए हैं।

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दो साल, ख्00 से अधिक शिकायतें, म्ब्0 से अधिक पेंडिंग

भ्रष्टाचार की शिकायतों के मामलों में हरिद्वार सबसे आगे हैं। साफ है कि जनता को विश्वास है कि अब भी लोकायुक्त में उनकी शिकायतें सुनी जाएंगी। लोकायुक्त कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले दो सालों में ख्00 से अधिक शिकायतें पहुंची हैं। जबकि सितंबर ख्0क्फ् से पहले की करीब म्ब्0 शिकायतें पेंडिंग हैं।


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