जानें क्यों PPS अफसर नाराज बदसलूकी करने वाले IPS के खिलाफ करेंगे आंदोलन

2019-02-04T10:08:37Z

आईपीएस अफसरों द्वारा लंबे समय से प्रदेश के महानगरों में कमिश्नर प्रणाली लागू करने की मांग को पीपीएस एसोसिएशन ने नकार दिया है।

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LUCKNOW: आईपीएस अफसरों से लगातार चल रहे तल्ख रिश्तों के बीच रविवार को आयोजित पीपीएस एसोसिएशन की हंगामेदार जनरल बॉडी मीटिंग में इसका जमकर विरोध हुआ। बैठक में एएसपी दिनेश यादव को अध्यक्ष और एएसपी राजेश सिंह को निर्विरोध एसोसिएशन का महामंत्री चुन लिया गया। इसके अलावा बैठक में वेतन व प्रमोशन में विसंगति को दूर करने के साथ ही पीपीएस अफसरों से अभद्रता करने वाले आईपीएस अफसरों के खिलाफ आंदोलन का भी निर्णय लिया गया।
सौतेले व्यवहार से नाराजगी
राजधानी के पुलिस ऑफिसर्स मेस में आयोजित पीपीएस एसोसिएशन की जनरल बॉडी मीटिंग में आईपीएस अफसरों द्वारा किये जा रहे सौतेले व्यवहार पर नाराजगी जताई गई। सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मौजूद सदस्यों ने अपना पक्ष बेहद आक्रामकता से रखा। सदस्यों का कहना था कि प्रदेश में कमिश्नर प्रणाली की मांग सीनियर आईपीएस अफसरों की बैकडोर से फिर से पावर पाने की चाहत है, जिसका विरोध किया जाना चाहिये। सदस्यों ने कहा कि इस मामले में वे आईएएस अफसरों के साथ हैं, जो प्रदेश में कमिश्नर प्रणाली का विरोध कर रहे हैं। इसके साथ ही आईपीएस अफसरों द्वारा पीपीएस अफसरों के साथ की जाने वाली अभद्रता से भी सदस्य बेहद खफा नजर आए। बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि अब से किसी भी जिले में आईपीएस अफसर अगर पीपीएस अफसर के साथ बदसलूकी करेंगे तो उनके खिलाफ वहीं आंदोलन छेड़ दिया जाएगा।

प्रमोशन प्रस्ताव जल्द भेजने की मांग

बैठक में पीपीएस अफसरों के प्रमोशन में हो रही देरी पर भी नाराजगी जताई गई। कहा गया कि प्रदेश में खाली पड़े 108 आईपीएस पदों में से डीजीपी ने हाल ही में 48 पद एकमुश्त पीपीएस अधिकारियों को इस शर्त पर दिये जाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था कि जैसे-जैसे इस पद पर प्रमोट होने वाले रिटायर होते जाएंगे, वैसे-वैसे उक्त पद खुद ब खुद आईपीएस कैडर के होते जाएंगे। यह प्रस्ताव अब तक शासन में ही लंबित है। मांग की गई कि इस प्रस्ताव को जल्द से जल्द भारत सरकार को भेजा जाए। इसके अलावा पीपीएस अफसरों के डीएसपी से एएसपी पद पर प्रमोशन का मानक आठ साल से बढ़ाकर 12 साल करने पर भी नाराजगी जताई गई। कहा गया कि आईपीएस में चयन के लिये यूपी पुलिस सेवा में महज आठ साल की सेवा का मानक निर्धारित है। इसलिए डीएसपी से एएसपी पद पर प्रमोशन के लिये 12 वर्ष का मानक औचित्य पूर्ण नहीं है।  इसके साथ ही बैठक में पीसीएस कैडर की ही तरह पीपीएस कैडर का वेतन और प्रमोशन निर्धारित किया जाये।
एएसपी व डीएसपी के पद पर तैनात न हों आईपीएस
बैठक में कहा गया कि वर्ष 2000 में ही संपूर्ण प्रदेश में विभिन्न वेतनमानों के डिप्टी एसपी और एएसपी के पदों को चिन्हित कर दिया गया था। उस वक्त यह नीति बनी थी कि पीपीएस अफसरों की नियुक्ति इन चिन्हित पदों पर ही किया जाये। वर्तमान में प्रांतीय पुलिस सेवा के इन पदों पर आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति की जा रही है। जिससे कैडर में निराशा है। बैठक में मांग की गई कि इन पदों पर केवल पीपीएस अफसरों की नियुक्ति की जाये।

एएसपी के अधिकार व कर्तव्यों का हो निर्धारण

बैठक में सदस्यों ने कहा कि एडिशनल एसपी के पद का सृजन 1984 में किया गया लेकिन, आज तक इस पद के अधिकार व कर्तव्य ही निर्धारित नहीं किये गए। कहा गया कि वर्ष 2000 में तत्कालीन डीजीपी श्रीराम अरुण द्वारा एएसपी के अधिकारों को निश्चित करने के लिये तत्कालीन डीआईजी एंटी करप्शन एनआर श्रीवास्तव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया था। विस्तृत अध्ययन के बाद कमेटी ने अपनी रिपोर्ट दे दी लेकिन, 18 वर्ष बीत जाने के बावजूद अब तक इस संबंध में कोई शासनादेश नहीं जारी किया गया। बैठक में सर्वसम्मति से मांग की गई कि एएसपी के अधिकारों व कर्तव्यों का निर्धारण किया जाए।

नवनिर्वाचित कमेटी

अध्यक्ष:            एएसपी दिनेश यादव
वरिष्ठ उपाध्यक्ष:    एएसपी जयप्रकाश सिंह
उपाध्यक्ष:           एएसपी वीरेंद्र कुमार
                     एएसपी अमृता मिश्रा
                     एएसपी डीके धवन
महासचिव:         एएसपी राजेश सिंह
कोषाध्यक्ष:         एएसपी विनय चंद्रा
सचिव:              एएसपी अभय त्रिपाठी, संजय सागर, डीएसपी राजेश तिवारी, संतोष कुमार सिंह, दीपक कुमार सिंह।

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