मंजिल उन्‍हीं को मिलती है जिनके सपनो में जान होती है पंखों से कुछ नहीं होता है दोस्‍त हौसलों से उड़ान होती है। इन लाइनो को चेन्‍नई की रहने वाली पहली ट्रांसजेंडर सब इंस्‍पेक्‍टर ने सच कर के दिखाया है। कहते हैं जुनून के आगे पहाड़ भी दम तोड़ देता है फिर जिसे जिंदगी में आगे बड़ना हो अपनी पहचान बनानी हो उसे चंद मुश्किलें कैसे रोक सकती हैं। कुछ ऐसा ही किया इस महिला ने अपनी जिद को सच में बदल कर।


देश की पहली ट्रांसजेंडर बनी पृथिकाजनाब हम बात कर रहे हैं चेन्नई की रहने वाले 26 वर्षीय पृथिका यशिनी की जिन्होंने ने चेन्नई में सब इंस्पेक्टर बन कर इतिहास रच दिया है। पृथिका का जन्म चेन्नई में प्रदीप कुमार के रूप में हुआ था। कंप्यूटर में अंडरग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उन्होंने परिवर्तन सर्जरी करवाई और प्रदीप से पृथिका बन गई। उपनिरीक्षक के पद पर पृथिका का आवेदन इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि लिंग को भरने के लिए आवेदन में केवल दो कॉलम पुरुष या महिलाएं थे। जब उसे पता चला कि आवेदन स्वीकार नहीं किया गया क्योंकि वह ट्रांसजेन्डर है तो उसने उच्च न्यायालय में अपील की। कोर्ट ने पृथिका के पक्ष में फैसला सुनाया। 2016 में कोर्ट ने दिये थे नियुक्ति के आदेश
तमिलनाडु के धर्मापुरी जिले में उप-निरीक्षक के रूप में कार्यभार संभालने वाली पृथिका भारत की पहली ट्रांसजेन्डर सब-इंस्पैक्टर बनी है। पृथिका ने पुलिस में शामिल होने के लिए एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी। अपनी ट्रेनिंग खत्म करने के बाद रविवार को धर्मपुरी में पुलिस अधीक्षक को अपने ज्वाइंनिंग दस्तावेज सौंपे। उन्होंने 6 महींने की व्यावहारिक प्रशिक्षण लिया है। पृथिका ने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों और मेरे सहकर्मियों के बहुत अच्छे व्यवहार की वजह से मैं बिल्कुल परेशान नहीं थी। मैं अपने पहले दिन ड्यूटी पर जाने को लेकर बहुत उत्साहित थी। कोर्ट ने पिछले साल फरवरी में नियुक्ति का आदेश दिया गया था।Interesting News inextlive from Interesting News Desk

Posted By: Prabha Punj Mishra